क्षेत्र के गांव रामपुर में गत 10 सितंबर की सुबह आबादी से 500 मीटर दूर अनूप के खाली पड़े खंडहरनुमा मकान में बकैना के पेड़ से विवाहिता गीता की लाश लटकती हुई मिलने के मामले का खुलासा करते हुए सोमवार को पुलिस ने बताया कि गीता मारी नहीं गई, बल्कि वह खुद अपने कमरे में ही फंदे पर लटककर मर गई। बाद में पति धीरेंद्र और ससुर धनीराम ने उसकी लाश को वहां से उतारा और अंधेरे में ही तड़के ले जाकर खंडहर में पेड़ से लटका दिया था। पूरे किस्से में खुद को बचाए रखने के लिए दोनों ने अपने ही गांव के तीन और कायमगंज निवासी एक युवक पर दुराचार के बाद हत्या करने का आरोप लगाने की कहानी गढ़ी थी। आईपीसी की धारा 304, 201, 498ए आदि में दोनों को सोमवार को जेल भेज दिया गया।
एसपी देहात शिवराम यादव प्रकरण का खुलासा करने के लिए यहां पहुंचे थे। इस दौरान एसओ शाहिद अली और अन्य अधिकारी गिरफ्तार आरोपियों के साथ मौजूद थे। बताया कि गीता की यह दूसरी शादी थी। उसकी पहली शादी फर्रुखाबाद में हुई थी, जहां वह ससुराल वालों को छोड़कर कुछ ही दिनों में हरदोई के सांडी थाना क्षेत्र के गांव बमटापुर स्थित मायके चली आई थी। बाद में उसके पिता रामाधार ने रिश्तेदार शिवराम को मध्यस्थ बनाया और गीता की शादी करीब आठ वर्ष पहले यहां रामपुर गांव के धीरेंद्र से करा दी थी। तब गीता की पहली शादी की बाद छुपा ली गई थी। बाद में पोल खुलने पर धीरेंद्र अपनी पत्नी और ससुराल वालों पर काफी बिदका था। कुछ समय में ही गीता की बदलचनी भी गांव में जगजाहिर होने लगी थी। यहां ससुराल में गंभीर आर्थिक तंगी थी और उसी क्रम में उसका मेलजोल गांव के कुछ खाते-पीते लोगों से हो जाने का शक होने पर धीरेंद्र और धनीराम उसे चाल-चलन सही रखने के लिए ताड़ना देने लगे। उन्हें जिन लोगों से उसके अवैध संबंध होने का शक था, उनके खिलाफ धारा 156 (3) के तहत शाहजहांपुर कोर्ट में गत सात सितंबर को प्रार्थना पत्र देकर सामूहिक दुराचार का केस दर्ज करने की गुहार की थी। उस प्रार्थना पत्र पर न तो गीता के हस्ताक्षर थे और ना ही अंगूठे का निशान लगा था, लेकिन उसमें गांव के सोनू, रिंकू और रामू एवं कायमगंज निवासी नन्हें के खिलाफ नामजद शिकायत थी। कोर्ट ने उस अरजी पर सुनवाई के लिए 14 सितंबर की तिथि तय कर बयान देने के लिए आवेदक को बुलाया था एवं अल्हागंज थाना से आख्या तलब की थी।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, धीरेंद्र और धनीराम ने नामजद आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चलकर बयान देने के लिए जब गीता पर दबाव बनाया तो उसने गत नौ सितंबर की देर रात या 10 सितंबर के तड़के घर की दीवार में बने रोवा से अपनी साड़ी का फंदा बनाकर जान दे दी। उसकी मौत की जानकारी मिलते ही उक्त दोनों ने लाश को उतारा और गांव के बाहर खंडहर में खड़े बकैना के पेड़ पर उसे लटका दिया फिर अपनी गढ़ी कहानी बयान करनी शुरू कर दी, लेकिन तभी गीता के पिता और चाचा ने थाने में दहेज हत्या की तहरीर देकर दामाद को नामजद करा दिया था।
एसपी देहात के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी हैंगिंग की पुष्टि हुई है और गिरफ्तार आरोपियों के बयान से भी सामने आई कहानी के आधार पर इस केस में धारा 302 को नहीं लगाया गया है।