मुकदमे में गवाही देने की रंजिश में की गई हत्या के पांच दोषियों को प्रथम
एडीजे उमेश कुमार शर्मा ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। एक आरोपी की मुकदमे
के दौरान मौत हो गई थी।
मामला पुवायां थाना क्षेत्र के गांव धर्मंगदापुर
खुर्द का है। गांव के परमहंस ने अपने पिता मैकूलाल की हत्या का आरोप लगाते
हुए 16 मार्च 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उनके अनुसार मैकूलाल ने एक
मुकदमे में मुल्जिमानों के विरुद्ध गवाही दी थी। इस बात से मुल्जिमान रंजिश
मानने लगे।
16 मार्च, 2005 की रात दो बजे जब मैकूलाल घर के बाहर छप्पर के
नीचे सो रहे थे, तभी गांव के हीरालाल, उसके पुत्र कामता, सोबरन व तौलेराम
और उसके पुत्र सोनपाल और गांव के द्वारिका रायफल और कांता लेकर घर में घुस
आए और पिता की हत्या कर दी।
साक्ष्यों का अवलोकन और सरकारी वकील वंशीलाल
के तर्कों से सहमत होकर जज ने तौलेराम, हीरालाल, सोबरन, कामता और सोनपाल
को उम्रकैद और 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सुनवाई के दौरान
आरोपी द्वारिका की मौत हो गई थी।
हत्या की कोशिश करने के
आरोपी को 10 साल कैद
शाहजहांपुर।
हत्या की कोशिश करने के मामले में एडीजे 25 भगवती प्रसाद सक्सेना ने
जलालाबाद थाना क्षेत्र के गांव कोला निवासी रामशंकर को 10 साल कारावास और
पांच हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई है।
जलालाबाद के कोठीवाला बाग
निवासी जोगेंद्र सिंह ने अपने भाई महेंद्र पर जानलेवा हमला करने का आरोप
लगाते हुए कोला गांव के धर्मेंद्र, बाबू, अवनीश व रामशंकर के विरुद्ध
रिपोर्ट लिखाई थी। इसके अनुसार 29 जुलाई 2006 को इनका भाई महेंद्र एलमपुर
की बगिया में मछली पकड़ने जा रहा था,
तभी रास्ते में इन लोगों ने महेंद्र
पर जान से मारने के इरादे से हमला कर दिया था। पुलिस ने 19 अगस्त को आरोपित
बाबू को मय तमंचा गिरफ्तार कर लिया। बाबू ने उसी तमंचे से महेंद्र को गोली
मारना स्वीकार कर लिया था।
साक्ष्यों के आधार पर जज ने रामशंकर को
हत्या के प्रयास का दोषी मानकर 10 वर्ष कारावास और पांच हजार रुपये
जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में अन्य आरोपितों की पहले ही सजा
सुनाई जा चुकी है। आरोपित रामशंकर दो सितंबर 2011 को न्यायालय में उपस्थित
नहीं था। इसलिए इसकी पत्रावली पृथक कर दी गई थी। शुक्रवार को सजा सुनाई गई
है।