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फर्जी था 21 वर्ष पहले पुवायां में हुआ एनकाउंटर

Sun, 30 Nov 2014 07:07 PM IST
पुवायां
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वर्ष 1993 में 12 अक्तूबर की रात पंजाब निवासी जिस हरजीत सिंह को पुवायां पुलिस ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास एनकाउंटर में मारा जाना बताया था, वह मुठभेड़ फर्जी साबित हो गई है। पटियाला (पंजाब) की सीबीआई की स्पेशल कोर्ट के जस्टिस कंवलजीत सिंह बाजवा ने पटियाला पुलिस के तत्कालीन डीएसपी हरिंदर सिंह, पुवायां के तत्कालीन इंस्पेक्टर आरके सिंह समेत चार अन्य पुलिस कर्मियों को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छुपाने का दोषी ठहराया है। सजा का ऐलान सोमवार को किया जाएगा। आरके सिंह को पंजाब पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। वह इस वक्त सीतापुर जिले में सीओ सिटी के रूप में तैनात थे।
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मामले में पुवायां पुलिस ने गांव बिलसड़ी बुजुर्ग के पास पंजाब के लुधियाना जिले के थाना पापल के गांव सहास मदारा के हरजीत सिंह को एक लाख का इनामी आतंकी बताते हुए मार गिराया था। एनकाउंटर के बाद उसके शव के पास से 38 बोर का विदेशी रिवाल्वर, 39 कारतूस और 11 खोखों की बरामदगी भी दर्शाई थी।

सीबीआई ने 1998 में शुरू की थी जांच
पुवायां के वकील विजय वर्मा ने हरजीत की हत्या किए जाने का तर्क देते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव से मामले की जांच कराए जाने और आरके सिंह सहित हरजीत की हत्या में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वर्ष 1996 में वर्मा की ओर से पुवायां थाने में मुकदमा संख्या 275 पर आरके सिंह के खिलाफ धारा 302, 342, 218, 201 के तहत रिपोर्ट दर्ज की गई थी। हरजीत सिंह के परिवार के लोगों ने उसकी हत्या किए जाने की बात कहते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से सीबीआई जांच की मांग की थी। कोर्ट के आदेश पर वर्ष 1998 में सीबीआई ने अपहरण, हत्या, शव को खुर्द बुर्द करने का केस दर्ज किया था। बाद में सीबीआई ने हरिंदर सिंह, आरके सिंह, पुवायां के तत्कालीन एसएसआई ब्रजलाल और सिपाही ओंकार सिंह को अभियुक्त बनाया था। पटियाला की सीबीआई कोर्ट ने शनिवार को जब दोष तय किया तो आरके सिंह वहीं मौजूद थे।
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मुठभेड़ के बूते पाया दो बार प्रमोशन
बताते हैं कि दो लोगों के एनकाउंटर के एक मामले में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर आरके सिंह को इंस्पेक्टर बनाया गया था। बाद में हरजीत सिंह के एनकाउंटर के बूते उन्हें सीओ के रूप में प्रमोशन मिला था। साथ ही राष्ट्रपति पदक भी मिला था। तत्कालीन एसएसआई ब्रजलाल वर्मा इंस्पेक्टर के रूप में प्रमोशन पा गए थे। सिपाही ओंकार सिंह का भी प्रमोशन हुआ था।
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