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क्राइम ब्रांच ने जुटाए घटना से जुड़े साक्ष्य

Wed, 17 Jun 2015 11:21 PM IST
शाहजहांपुर।
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जगेंद्र प्रकरण के मामले में बुधवार को बरेली क्राइम ब्रांच की टीम जांच के लिए आई। टीम ने घटनास्थल का मुआयना किया। घटना से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की। इसके अलावा क्राइम ब्रांच की टीम ने जगेंद्र प्रकरण से संबंधित साक्ष्य जुटाए।
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बरेली क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सैयद अनवार अली और इंस्पेक्टर अंतराम सिंह बुधवार को जगेंद्र से जुड़े मुकदमों की जांच के लिए आए। क्राइम ब्रांच की टीम ने घटनास्थल का भी मुआयना किया। साथ ही मुकदमों से जुड़े लोगों से भी पूछताछ की। क्राइम ब्रांच की टीम ने थाना सदर बाजार पुलिस से जगेंद्र की पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पंचनामा से जुड़े कागजात लिए। क्राइम ब्रांच की टीम ने एसपी सिटी राजेश कुमार से भी थाना सदर बाजार में मुलाकात की।

महिला के बयान से पुलिस को मिली राहत
शाहजहांपुर। जगेंद्र की महिला मित्र के ताजा बयान से हत्या में आरोपित पुलिस वालों को बड़ी राहत मिली है। अगर यही बयान कोर्ट में भी कलमबंद हुआ है तो मामला काफी हद तक पलट सकता है। घटना के दिन पुलिस पर सीधे जगेंद्र को जलाने का आरोप लगाने वाली यह महिला 8 जून से किसी को नहीं मिल रही थी लेकिन पुलिस के संपर्क में आ गई थी। अपने वकील और जगेंद्र के परिवार से भी मंगलवार के बाद उसने बात नहीं की थी।
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जगेंद्र के साथ जिस दिन घटना हुई थी उस दिन जगेंद्र की महिला मित्र ने बताया था कि वह एसपी कार्यालय में शिकायत करने आई थीं। शिकायत करने के बाद जब घर वापस जा रही थीं, तभी तत्कालीन कोतवाली प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश राय ने उन्हें जबरन अपनी गाड़ी में बैठा लिया था। गाड़ी में राज्यमंत्री का करीबी गुफरान भी मौजूूद था। पुलिस जगेंद्र के दरवाजे पर पहुंची। इसके बाद गुफरान ने उनका हाथ पकड़ लिया था। इसके बाद पुलिस जगेंद्र के मकान में कूद गई थी। बकौल महिला, पुलिस के कूदने के बाद जगेंद्र की चीखपुकार सुनकर वह गुफरान से अपना हाथ छुड़ाकर अंदर पहुंची तो जगेंद्र जल रहे थे। महिला के मुताबिक पुलिस ने उसके ऊपर भी पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने का प्रयास किया था। उन्होंने किसी तरह से भागकर अपनी जान बचाई थी।महिला मंगलवार को पुलिस को दिए बयान में अपने पहले बयान से मुकर गई है। महिला ने पुलिस को बताया कि जगेेंद्र ने पुलिस को डराने के लिए खुद ही आग लगा ली थी।

मृत्यु पूर्व बयान एकमात्र पर्याप्त साक्ष्य
मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट के सामने दिया गया बयान एकमात्र पर्याप्त साक्ष्य होता है। यदि अन्य कोई गवाह बयान देता है, भले ही वह मृत्यु पूर्व कथन के विपरीत हो, तो भी वह इतना मायने नहीं रखता है। सुप्रीम कोर्ट ने 2012 ने भज्जू उर्फ करन सिंह बनाम मध्य प्रदेश मामले में यह व्यवस्था दी है। कानून यह मानता है कि कोई व्यक्ति मरते समय झूठ नहीं बोलता है, किंतु किन परिस्थितियों में बयान दर्ज हुआ है यह बात भी मायने रखती है।
-रामखिलावन त्रिपाठी, अधिवक्ता

यदि किसी मामले में मृत्यु पूर्व बयान देने वाला व्यक्ति मुल्जिम हो तो ऐसा व्यक्ति किसी के खिलाफ भी बयान दर्ज कराकर उसे फंसा सकता है जबकि उसे अपनी मृत्यु का आभास न हो। ऐसी स्थिति में मृत्यु पूर्व बयान के साथ ही अन्य साक्ष्य भी मुकदमे को प्रभावित कर सकते हैं।
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-जेपी कश्यप, अधिवक्ता फौजदारी
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