नगर में घनी आबादी वाले दातागंज और निजामगंज मोहल्ले में एक तेल माफिया के कारण क्षेत्र के कई मकान बारूद के ढेर पर टिके हैं। दरअसल, इन मोहल्लों में इस माफिया ने कालाबाजारी के केरोसिन से यहां कई जगह नकली डीजल बनाया जा रहा है। ऐसे में थोड़ी सी भी चूक होने पर बड़ा अग्निकांड होने की आशंका है।
बता दें कि वर्ष 1972 में भी इसी तरह पोटरगंज में तेल के गोदाम में भीषण आग लगने के बाद उस समय लाखों की संपत्ति जल गई थी। अब दातागंज और निजामगंज में कुटीर उद्योग की तरह नकली डीजल का कारोबार चल रहा है। चंद वर्षों पहले तक एक तेल डिपो पर मामूली सी नौकरी करने वाला यह तेल माफिया इस समय तेल के अवैध कारोबार का बेताज बादशाह बना हुआ है। उसने राजस्व कर्मियों से लेकर संबंधित अफसरों तक गहरी पैंठ बना रखी है।
पुलिस को रोकटोक न करने
पर मिलता है नजराना
तेल माफिया से गहरी साठगांठ के चलते पुलिस कालाबाजारी को जा रहे तेल को रोकटोक न करने की गारंटी देती है। बदले में नगर के दो डिपो से निकलने वाले लगभग चार सौ ड्रमों से दस लीटर प्रति ड्रम तेल कटौती व सौ रुपये प्रति ड्रम सुविधा शुल्क वसूलकर माफिया स्थानीय पुलिस को प्रति माह नजराना पेश करता है।
तेल को लेकर दो गुटों
में हुई थी फायरिंग
तेल के खेल को लेकर दीपावली के दूसरे दिन निजामगंज मोहल्ले में दो गुटों में आधा घंटे जबरदस्त फायरिंग हुई। इससे मोहल्ले में हड़कंप मच गया था। इस कारण लगभग बीस दिन तक काम बंद रहा था।
एक बार पकड़ा,
मगर छोड़ दिया
पिछले साल नौ जून को एसडीएम बीडी वर्मा द्वारा छापा मारकर बिरियागंज में नकली डीजल बनाने का कारखाना पकड़ा गया था। वहां बरामद रजिस्टर में उक्त माफिया के लाखों के लेनदेन का कच्चा चिट्ठा भी बरामद हुआ था। मगर बाद में मामला दबा दिया गया था।
नकली डीजल व तेल के अवैध कारोबार का कोई प्रकरण मेरे संज्ञान में नहीं है। इस संबंध में एसडीएम और आपूर्ति विभाग के माध्यम से ही निगरानी रखी जाती है।
-रूम सिंह यादव, कोतवाल