दुराचार के केस में जेल में बंद आसाराम और बाहर उनके गुर्गों का एक ही लक्ष्य है कि केस को कमजोर करने के लिए गवाहों को तोड़ो और जो ना टूटे उसका सफाया करो। इसके लिए नोटों की कमी नहीं है। विदेशों में 10 और देश में फैले 400 से अधिक आश्रमों के नेटवर्क से इस बड़ी साजिश पर उनके भरोसेमंद सेवादारों ने कमान संभाल रखी है। शाहजहांपुर निवासी कृपाल की हत्या से पहले भी उसे मोटे ऑफर दिए गए। मोबाइल पर गुर्गों के मार्फत इसे गवाही से मुकरने के लिए 50 लाख रुपये तक का जेल से आसाराम ने ऑफर दिया था।
करीब 23 माह पहले जोधपुर में शाहजहांपुर की बिटिया से दुराचार करने वाले आसाराम के भरोसेमंद सेवादार पुलिस की भाषा में उनके कट्टर समर्थक और अंधभक्त हैं। शनिवार को जेल भेजा गया नारायण पांडेय उर्फ पुष्पेंद्र पांडेय छह दिसंबर 2014 को शाहजहांपुर बिटिया के पिता को धमकाने के आरोप में अपने सहयोगी प्रदीप मिश्रा के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब उसने पुलिस को बयान दिया था कि वह पास के ही लोहे के कारीगर के स्टाल पर छेनी ठीक कराने आया था। उसी समय यह सवाल उठा था कि मूल रूप से गोरखपुर और अब कानपुर के पते पर रहने वाला यह इतनी दूर छेनी बनाने के लिए क्यों आया था। वह जमानत पर छूट गया था। यहां आसाराम केस के गवाह कृपाल के साथ वह चार दफा बिटिया के पिता से मिला और उन पर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया।
शनिवार शाम केस का खुलासा करते हुए सीओ सिटी डॉ. कृष्ण गोपाल यादव और सदर कोतवाली प्रभारी जेपी तिवारी ने बताया कि गत 10 जुलाई की रात सदर थाना क्षेत्र के गदियाना निवासी कृपाल सिंह को ओसीएफ मंदिर के पास शूटरों से गोली मरवाने से पहले यह सात बार शाहजहांपुर आया। हर बार गवाही से मुकरने के लिए कृपाल को खुली अटैची में 10 से 20 लाख रुपये दिखाए गए और कहा कि जितनी मर्जी हो उठा लो और चाहिए तो वह भी मिलेंगे। गवाही से हफ्ता भर पहले भी मुलाकात की। उसी दौरान मोबाइल पर जेल में बंद आसाराम से सीधी बात भी कराई गई। अब वही आडियो टेप पुलिस के पास भी है, जिसमें ऐसी बातचीत की पुष्टि हो रही है।
कोर्ट में फूट-फूट कर रोया नारायण
शाहजहांपुर। आसाराम के जोधपुर आश्रम का मुख्य सेवादार और गवाह कृपाल सिंह की हत्या के मामले में मुख्य साजिशकर्ता नारायण पांडेय उर्फ पुष्पेंद्र शनिवार तीसरे पहर सीजेएम कोर्ट में पेश होने पर फूट-फूट कर रोया। पुलिस ने विवेचना हेतु अभियुक्त की पुलिस कस्टडी की रिमांड देने की याचना की तो सीजेएम ने नारायण से उसके वकील के बारे में पूछा और जवाब ना रहा। सीजेएम राजेश्वरी टोलिया ने 27 जुलाई को इस पर सुनवाई नियत की और अभियुक्त को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
सीजेएम के सामने नारायण ने रोते हुए खुद को और आसाराम को निर्दोष बताया। इससे पहले सदर कोतवाली से कोर्ट ले जाए जाते समय मीडिया को सामने देखते ही उसने कहा कि उसकी बाइट ली जाए। उसने कहा कि वह कृपाल की हत्या वाले दिन गत 10 जुलाई की दोपहर करीब दो बजे शाहजहांपुर पहुंचा और आश्रम पहुंचकर पूजन और ध्यान में लीन रहा। कहा कि उसके जैसे और भी अनुयायी हैं जो आसाराम को सत्य और निर्दोष साबित करने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देंगे। बताया कि वह खुद बिटिया की पिता से मिला तो उन्होंने इस मामले में काफी दबाव होने की बात स्वीकारी थी, जिसके चलते वह केस वापस नहीं ले रहे थे। उसने दावा किया कि आसाराम पर लगे मुकदमे झूठे हैं और वह किसी साजिश का हिस्सा हैं।