भारत-नेपाल के गौरीफंटा बार्डर पर एसएसबी ने कजाकिस्तान (किर्गिस्तान) की एक लड़की को कार से दो लोगों के साथ हल्द्वानी जाते समय पकड़ लिया। लड़की पूछताछ के दौरान कोई भी वैध कागजात नहीं दिखा सकी। तीनों लोगों को कार समेत गौरीफंटा पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया। पकड़े गए दोनों युवक बरेली के रहने वाले हैं। पुलिस ने दूतावास को सूचना दे दी है। पहले बताया गया कि गाड़ी किसी ट्रेवल एजेंसी की है लेकिन बाद में कहा गया कि यह एक महिला की निजी गाड़ी है। इस प्रकरण को सैक्स रैकेट के लिए मानव तस्करी के रूप में देखा जा रहा है। पुलिस अधिकारी अभी तफ्तीश पूरी न होने की बात कह कर पूरी जानकारी नहीं दे रहे हैं। बाद में तीनों आरोपी छह अगस्त तक जेल गए गौरीफंटा पुलिस ने लड़की युवती समेत तीनों आरोपियों को सीजेएम नवनीत गिरि की कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें छह अगस्त तक न्यायिक हिरासत में जिला जेल भेज दिया गया।
गौरीफंटा में एसएसबी ने एक कार में सवार एक विदेशी लड़की को दो लोगों के साथ देखा तो गाड़ी रोक ली। पूछताछ पर लड़की और उसके साथ जा रहे युवकों ने बताया कि लड़की का वीजा संजय नाम के व्यक्ति के पास है, जो कि नेपाल में रहता हैं। संजय ने लड़कों को लड़की को हल्द्वानी में छोड़ने के लिए भेजा है। इस संबंध में एसपी अरविंद सेन ने बताया कि लड़की गैर कानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने की वजह नहीं बता पाई और न ही उसके साथ जा रहे वाहन चालक हरिचन्द्र शर्मा उर्फ भूकन लाल निवासी शांति विहार थाना सुभाषनगर (बरेली) और सतेन्द्र मिश्र निवासी सिकलापुर फर्नीचर मंडी थाना बारादरी (बरेली) को अपने साथ लाने का कारण बता सकी। जिस कारण थाना गौरीफंटा पुलिस ने एसएसबी कमांडर विवेक कुमार की तहरीर पर धारा विदेशी विषयक अधिनियम 1946, धारा 3 पासपोर्ट भारत में प्रवेश अधिनियम 1920 और धारा 120 भादवि के अंतर्गत अभियोग पंजीकृत कर चालान भेज दिया है। एसपी का कहना है कि कार निजी है या किसी ट्रैवल एजेंसी की यह विवेचना का विषय है। इधर, एसएसबी के मुताबिक विदेशी युवती ने अपना नाम नतालिया (21) पता बिसेकी, कजाकिस्तान बताया है। पुलिस ने इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने के साथ ही कजाक दूतावास को भी जानकारी कर दी है। तीनों का मेडिकल पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कराया है, जहां पर गौरीफंटा कोतवाल कृष्ण कुमार शर्मा, समरजीत सिंह, एसएसबी की एमसीपी पूनम राना सहित पुलिस बल मौजूद रहा।
कजाकिस्तान निवासी युवती हिंदी बिल्कुल नहीं बोल पा रही है, उसकी भाषा कजाकिस्तान की है। इसके कारण बहुत कुछ पता नहीं चल पा रहा है। उसने जो भी जानकारी दी इशारों में या उसके साथ जा रहे युवकों ने दी। युवक भी ज्यादा कुछ नहीं बता सके। इससे इस राज पर पर्दा पड़ा हुआ है कि वह क्यों उसे हल्द्वानी ले जा रहे थे।
कहीं मानव तस्करी से तो नहीं जुड़े हैं तार
विदेशी युवती को क्यों लाया जा रहा था, इसके पीछे क्या राज है यह अभी सवालों के घेरे में ही लेकिन सूत्रों की माने तो यह मानव तस्करी से जुड़ा मामला है। अगर ऐसा है तो भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक चिंता का विषय है।
नेपाल से पूर्व से ही हो रही मानव है तस्करी
नेपाल में गरीबी ज्यादा होने के कारण मानव तस्करी तो आम बात हो चुकी थी और इसको रोकने के लिए नेपाल की माइती संस्था ने आगे आकर कदम बढ़ाए थे, लेकिन अब मामला विदेश से जुड़ा है सूत्रों की खबरों से यह तो साफ हो रहा है कि कहीं न कहीं इस मामले में भी कुछ गड़बड़ है। अगर यह आशंका हकीकत में तब्दील होती हैं तो नेपाल के लिए एक बड़ा खतरा है।
विदेशी लड़की मामले में पुलिस ने दिखाई जल्दबाजी
लखीमपुर खीरी। भारत-नेपाल बार्डर पर पुलिस ने विदेशी लड़की को दो भारतीय युवकों के साथ पकड़े जाने के मामले में ज्यादा पड़ताल नहीं की। लड़की के सामने भाषा की समस्या थी। यदि दुभाषिया को बुलाया गया होता तो कई राज सामने आ सकते थे। लेकिन पुलिस ने चंद घंटों के भीतर ही लड़की और उसके सहयोगियों का चालान कर दिया गया।
नेपाल बार्डर से जिस तरह कजाकिस्तान (किर्गिस्तान) की लड़की को एसएसबी टीम ने कब्जे में लिया है, वह खुद रहस्यों से भरा है। इससे आईबी और सतर्कता एजेंसियों की निगरानी में कहीं न कहीं चूक तो सामने आई है, क्योंकि एसएसबी टीम ने इसे रूटीन चेकिंग में कब्जे में लिया है। उसे सतर्कता एजेंसियों के माध्यम से किसी तरह की पूर्व सूचनाएं नहीं मिलीं थीं। संदिग्ध हालात में भारत में प्रवेश करने वाली युवती को पकड़ने के बाद जिस तरह से उसे आननफानन में चालान करने का गुडवर्क दिखाया गया, वह बेहद गैर जिम्मेदाराना है।
पुलिस को यह तक नहीं पता युवती को कहां जाना था
एसपी अरविंद सेन की माने तो वह कोर्ट में पेश कराने की जल्दबाजी में अभी यह नहीं पता लगा पाए हैं कि किर्गिस्तान की युवती को हल्द्वानी में कहां ले जाया जाना था। यहां तक कि नेपाल के संजय से पकड़े गए युवकों को कब और कहां संपर्क हुआ? किस तरह वह बरेली से उत्तराखंड के नंबर वाली इनोवा कार से यहां तक पहुंच गए? यह भी उन्हें नहीं मालूम? एसपी देर शाम तक उत्तराखंड पुलिस अथवा बरेली पुलिस से संपर्क की बाबत कहते हैं कि यह विवेचना का विषय है। जो जांच उपरांत सामने आएगा।
चार साल पहले पकड़े गए थे कोरियन दंपति
इसी तरह गौरीफंटा पुलिस ने बार्डर पर चार साल पहले कोरियन दंपति को बिना पासपोर्ट के पकड़ा था। हालांकि उस समय भी खुफिया और सतर्कता एजेंसियों ने पूरे मामले में अपनी कोई फाइंडिंग नहीं दी थी। आखिरकार पुलिस की चार्जशीट के मुताबिक दोनों ने तीन माह की सजा काटने के बाद उनके देश भेज दिया गया था।
तो काफी चालाक है पकड़ी गई लड़की
पुलिस सूत्रों की माने तो पकड़ी गई विदेशी लड़की के मोबाइल में उसके बीजा और पासपोर्ट के स्नैप मौजूद थे, लेकिन दोनों कागजात उसके पास नहीं थे। बातचीत में भी ऐसा प्रतीत होता था कि सबकुछ समझ रही है। इससे उसके चालाक होने का पता चलता है, लेकिन अधिकारी चुप्पी साधे है।
कहीं पीछे ड्रैगन का हाथ तो नहीं
इसे महज संयोग ही नहीं कहा जा सकता कि कोरियन दंपति भी नेपाल में रहकर इसी गौरीफंटा बार्डर के जरिए भारत में प्रवेश किया था। इस बार भी किर्गिस्तान की युवती को भारत में प्रवेश दिलाने के लिए नेपाल के जरिए इसी रास्ते से लाया गया। भौगोलिक दृष्टिकोण की बात करें तो कोरिया और किर्गिस्तान दोनों देशों की सीमाएं चीन से मिली हुई हैं। वहीं किर्गिस्तान की सीमाएं पाकिस्तान से मिली हुई हैं। ऐसे में यह अंतराष्ट्रीय मुद्दा है, जिसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।