डीएम साहिबा, मौत के सौदागरों से मेरे पति को बचाइए। रोजा कस्बे में नशे के रूप में मौत बांट रहे कुछ मेडिकल स्टोर्स के मालिकों के खिलाफ कुछ तो कीजिए। यहां हर मेडिकल स्टोर पर धड़ल्ले से नशेे के इंजेक्शन, गोलियां और कैप्सूल बिक रहे हैं। तमाम कफ सीरफ और आयोडेक्स तक को नशे के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह पीड़ा बल्लिया गांव की पारो की है। उनका पति शंकर तपेदिक से लड़ रहा है, लेकिन कस्बे के मेडिकल स्टोर्स के मालिकों ने प्रतिबंधित और नशीली दवाओं का उनके पति को आदी बना दिया है। पति की नशे की लत से पांच बच्चों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है। पारो का आरोप है कि दो जुलाई को कस्बे के दो मेडिकल स्टोर्स के मालिकों ने उसके पति शंकर के नशे को दो इंजेक्शन लगाए थे। इससे उसकी हालत बिगड़ गई। शंकर को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। वह बच तो गए, लेकिन उन्हें अब लंबे इलाज की जरूरत है।
पारो ने डीएम और सीएमओ से शिकायत कर आरोप लगाया है कि रोजा अड्डा, मालगोदाम रोड, बल्लिया मोड़ पर कई मेडिकल स्टोर्स हैं, जिनके पास कोई प्रशिक्षित कर्मचारी भी नहीं हैं। इन्होंने सिर्फ डीफार्मा का प्रपत्र भरकर लाइसेंस प्राप्त कर लिए हैं। आरोप है कि ये कस्बे के युवाओं को प्रतिबंधित दवाएं उपलब्ध कराकर उनको मौत के मुंह में धकेल रहे हैं। पिछले एक साल में कस्बे के नेमपाल, श्रीपाल और ढेवा की मौत नशीली दवाओं के सेवन से हो चुकी है। आरोप है कि उसने रोजा पुलिस को मेडिकल स्टोर्स स्वामियों द्वारा बेची गई प्रतिबंधित लुपीजैसिक, फोर्टबिन और कांपोज इंजेक्शन और इसी की टेबलेट भी दीं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मेडिकल स्टोर्स पर छापे की कार्रवाई ड्रग्स इंस्पेक्टर द्वारा की जाती है। गड़बड़ी पाए जाने पर स्वास्थ्य विभाग ही कार्रवाई करता है। शिकायत पर मेडिकल स्टोर्स के मालिक की तलाश की गई थी वह नहीं मिला है। इसकी रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजी जा रही है।
-आरएन चौधरी, प्रभारी निरीक्षक, रोजा