पत्रकार जगेंद्र की मौत के प्रकरण में प्रदेश सरकार और पीड़ित परिवार के बीच हुए समझौते के तहत मृतक के बेटों को दिए गए रिवाल्वर और राइफल के लाइसेंस निर्गत करने में जल्दबाजी की गई। निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं होने से प्रशासन को राइफल का लाइसेंस जरूरी औपचारिकताएं पूरी करने के लिए वापस लेना पड़ा है। मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति से राइफल के लाइसेंस का अनुमोदन लेने के लिए प्रशासन नए सिरे से शस्त्र पत्रावली तैयार करने में जुटा है।
यह हैं शस्त्र आवेदन की निर्धारित प्रक्रियाएं
शस्त्र कोई भी हो, उसका लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदकों को काफी पापड़ बेलने पड़ते हैं। कई तरह के प्रपत्रों के साथ शस्त्र आवेदन की दो प्रक्रियाएं प्रशासन स्तर पर लंबे समय से प्रभावी हैं। पहली प्रक्रिया के तहत आवेदन की फाइल शस्त्र कार्यालय में जमा करके उसे एसपी कार्यालय के माध्यम से संबंधित थाने भेजा जाता है। थाना और निकटतम पुलिस चौकी से आवेदक का सत्यापन और उसके चाल-चलन की रिपोर्ट मिलने के बाद सीओ की संस्तुति से पत्रावली एसपी कार्यालय जाती है। एसपी कार्यालय द्वारा स्थानीय अभिसूचना इकाई से आवेदक की रिपोर्ट मांगकर पत्रावली वापस शस्त्र कार्यालय भेजी जाती है। दूसरी प्रक्रिया के तहत आवेदन की पत्रावली तहसील कार्यालय में प्रस्तुत होने पर वहां से रिपोर्ट सहित शस्त्र कार्यालय भेज दी जाती है। प्रशासन का शस्त्र अनुभाग पहली प्रक्रिया का अनुसरण करके पत्रावली पर पुलिस की रिपोर्ट लेता हेग। बाद में डीएम स्तर से लाइसेंस की स्वीकृति मिलती है।
जगेंद्र के बेटों को कुछ घंटों में मिल गए थे लाइसेंस
जगेंद्र मौत प्रकरण में पीड़ित परिवार के सदस्यों की मुख्यमंत्री से लखनऊ में समझौता वार्ता होने के अगले दिन कुछ घंटों के अंदर राइफल और रिवाल्वर के शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिए गए। प्रशासन की जल्दबाजी को लेकर सवाल उस वक्त भी उठ रहे थे, लेकिन जब से अफसरों ने दोनों लाइसेंस तलब किए, लोग मुखर होने लगे हैं। कहा जा रहा है कि शासन के दबाव में प्रशासन ने पीड़ित परिवार को लाइसेंस देने में जल्दबाजी दिखाई।
राइफल लाइसेंस में शासनादेश का नहीं हुआ पालन
प्रभारी डीएम एमएन उपाध्याय ने स्वीकार किया कि जगेंद्र के बेटों को शस्त्र लाइसेंस जारी करते समय राइफल का लाइसेंस देने में कुछ प्रक्रिया पूरी करने में चूक हो गई। प्रभारी डीएम के अनुसार जगेंद्र के परिवार को निर्धारित प्रक्रिया से जारी रिवाल्वर का लाइसेंस लौटा दिया गया है। उन्होंने बताया कि एक शासनादेश के तहत राइफल के लाइसेंस का अनुमोदन मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी जिसके लिए पत्रावली तैयार की जा रही है। प्रभारी डीएम के अनुसार उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं कि पीड़ित परिवार को लाइसेंस देने के लिए शासन स्तर से लिखित आदेश मिले अथवा मौखिक। उन्होंने तो डीएम के आदेश पर जगेंद्र के दोनों बेटों को लाइसेंस जारी किए।