जलालाबाद क्षेत्र के गांव बड़े हरेवा में दलित महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाए जाने के विरोध में दलित संगठनों के पदाधिकारियों ने 24 घंटे का उपवास रखने के बाद शनिवार को अनुसूचित जाति जनजाति महासंघ के बैनर तले घंटाघर के अंबेडकर पार्क से पद यात्रा करके प्रदर्शन किया। बाद में कलक्ट्रेट जाकर हरेवा के गुनहगारों को फांसी दिए जाने का नारा बुलंद किया। महासंघ की ओर से मुख्यमंत्री के नाम अतिरिक्त मजिस्ट्रेट आदित्य प्रकाश श्रीवास्तव को इस आशय का ज्ञापन भी दिया गया।
पदयात्रा से पहले घंटाघर के अंबेडकर पार्क में हुई सभा में वक्ताओं ने बड़े हरेवा में दलित महिलाओं को निर्वस्त्र कर जानवरों की तरह पीटकर घुमाए जाने की एक स्वर से निंदा की। महासंघ से जुड़े घटक संगठनों के पदाधिकारी नारेबाजी करते हुए पद यात्रा निकालकर कलक्ट्रेट की ओर बढ़ चले। उन्होंने रिक्शे पर लाउडस्पीकर लगाकर प्रशासन, पुलिस और हरेवा कांड के दोषियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
कलक्ट्रेट के धरना थल पर हुई सभा में महासंघ के संरक्षक जगदीश चंद्रा और संयोजक सियाराम दिनकर ने कहा कि आजादी के 68 साल बाद भी हरेवा में दलितों के मकान में चहारदीवारी और दरवाजे नहीं होना सामाजिक और आर्थिक गुलामी का जीवंत प्रमाण है। माया देवी ने हरेवा जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकने के लिए दलितों को सुरक्षित आवास और गांव में पुलिस चौकी कायम करने पर जोर दिया।
सह संयोजक राम सिंह ने उत्पीड़न की घटनाओं पर दलित संगठनों की एकजुटता पर बल दिया। शोषित समाज मोर्चा के प्रदेश महासचिव फकीरे लाल भोजवाल ने जिले की महिला जनप्रतिनिधियों और अफसरों के नाम गिनाते हुए कहा कि महिलाओं पर अत्याचार के मुद्दे पर उनकी खामोशी शासन-प्रशासन का उदासीन रवैया प्रदर्शित करती है।
यह रहीं ज्ञापन की प्रमुख मांगें
महासंघ की ओर से अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को दिए गए ज्ञापन में घटना की किसी निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराने, पीड़ित महिलाओं से अभद्रता करने वाले एएसपी ग्रामीण को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने, पीड़ित महिलाओं को आत्मरक्षा के लिए शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत करने, पीड़िताओं को आवास के साथ 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने, सुरक्षा की दृष्टि से बड़े हरेवा में स्थायी पुलिस चौकी कायम करने आदि मांगों का उल्लेख किया गया है।
इन सभी की रही सहभागिता
पदयात्रा और प्रदर्शन में अनुसूचित जाति जनजाति माध्यमिक शिक्षक महासभा, भारतीय बौद्ध महासभा, बेसिक शिक्षक कल्याण समिति, अनुसूचित जाति विद्यार्थी परिषद, भारतीय कोरी समाज, कठेरिया समाज कल्याण समिति, गुरु रविदास सभा, मूल निवासी विचार मंच, भारतीय वाल्मीकि धर्म समाज, भारत मुक्ति मोर्चा, भगवान बुद्ध विहार समिति, सफाई मजदूर संघ, संत गाडगे सेवा समिति आदि संगठनों से जुड़े आरएन वर्मा, रामभजन लाल, महबूब हुसैन इदरीसी, भगवंत राम, कमलेश निगम, महेंद्र सिंह दिनकर, सुरेश चंद्र कठेरिया, रामऔतार, गोपाल कृष्ण आर्य, रक्षपाल, केके सिंह, राजेश कठेरिया, शिव सिंह, सत्यदेव गौतम, रामप्रकाश शास्त्री, बाबूराम भारती, दिनेश कुमार, नजमुल हसन, मदन पांडेय, अरुण मिश्रा, डॉ. जितेंद्र कुमार आदि शामिल रहे।