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फसली क्षति से परेशान छह और किसानों की मौत

Sun, 19 Apr 2015 11:28 PM IST
शाहजहांपुर।
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नुकसान से प्रभावित किसानों की अकाल मौत होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। पिछले 24 घंटे जिले मेें अलग-अलग स्थानों पर पांच किसानों की मौत हो गई। थाना रामचंद्र मिशन क्षेत्र के गांव चौढ़ेरा में 50 वर्षीय मान सिंह से फसली नुकसान सहन नहीं हुआ तो उन्होंने रविवार को सुबह खन्नौत नदी में कूदकर जान दे दी। इसी तरह परिवार की जिम्मेदारियों और कर्ज के बोझ से दबे मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव हदीरा हरदासपुर में रहने वाले 36 वर्षीय राजमंगल सिंह, अल्हागंज क्षेत्र के गांव रत्नापुर में 55 वर्षीय वीरेंद्र यादव, बंडा क्षेत्र के गांव सिमरई में 60 वर्षीय गुरवचन सिंह, निगोही क्षेत्र के गांव बझेड़ा बझेड़ी निवासी 45 वर्षीय राम सिंह और मिर्जापुर क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी 52 वर्षीय किसान राघवेंद्र की फसली नुकसान ने जान ले ली। इन्हें मिलाकर जिले में अब तक 33 किसानों की मौत हो चुकी है।
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केस-एक
खेत से अच्छे-भले लौटे गुरवचन की थमीं सांसें
मकसूदापुर/बंडा। गांव डिमरई निवासी 60 वर्षीय गुरवचन सिंह के पास दो एकड़ खेत है। उन्होंने दस बीघा में गेहूं की फसल बोई थी। उनका इकलौता पुत्र स्वर्ण सिंह मूक बधिर है। भतीजे परमजीत सिंह ने बताया कि गुरवचन सिंह पर जिला सहकारी बैंक और बड़ौदा पश्चिमी बैंक का लगभग दो लाख रुपये कर्ज था। इसके अलावा 20 हजार रुपये साहूकारों से लेकर गेहूं में लागत लगाई थी। बारिश से गेहूं की फसल खराब हो गई थी। शासन की ओर से उन्हें नौ हजार रुपये का सहायता चेक भी दिया गया था। शनिवार को गेहूं कटाया गया तो तो 10 बीघा में मात्र 12 क्विंटल ही गेहूं निकला। फसल की दुर्दशा देख रात में हालत बिगड़ी और रविवार सुबह उनकी मौत हो गई। गुरवचन की मौत से पत्नी प्रीतम कौर का रो रोकर बुरा हाल है। परमजीत सिंह ने बताया कि चाचा की मौत की जानकारी लेखपाल को दी गई, लेकिन लेखपाल में बाद में मामला देख लेने की बात कहकर टरका दिया।

केस-दो
खेत में गश खाकर गिरे वीरेंद्र फिर नहीं उठे
अल्हागंज। गांव रत्नापुर में गेहूं की फसल नष्ट होने से परेशान वीरेंद्र यादव खेत में ही गश खाकर गिर पड़े ओर घर लाने पर दम तोड़ दिया। मृतक के पुत्र अशोक ने बताया कि रविवार सुबह फसल की थ्रेसर से गहाई कराने पर प्रति बीघा लगभग एक क्विंटल गेहूं निकला, जबकि लागत तीन गुनी आई। बर्बाद फसल को देखकर उनके पिता की हालत खराब हो गई और वह खेत में ही गिर गए। जब तक उनको उठाया जाता उनकी सांस रुक गई। सूचना पाकर राजस्व विभाग की टीम ने गांव में जाकर निरीक्षण किया। मृतक पर बैंक का तीन लाख का फसली ऋण बकाया था।
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केस-तीन
किसान राजमंगल की हार्टअटैक ने ली जान
जैतीपुर/खेड़ा बझेड़ा। ब्लाक क्षेत्र के हदीरा हरदासपुर गांव में किसान राजमंगल की सीने में दर्द उठने से इलाज को ले जाते समय मौत हो गई। मृतक की पत्नी राजेशा देवी ने बताया कि उसके ससुर जयपाल सिंह की मृत्यु पिछले साल नवंबर में बीमारी से हुई थी। उनके इलाज को 50 हजार का कर्ज लिया। बाद में गेहूं की फसल बोने को भी कर्ज लिया। सोचा था फसल अच्छी होगी तो कर्ज चुकता कर देंगे, लेकिन पति राजमंगल ने बीते दिन कंबाइन से आठ  बीघा गेहूं कटवाए तो करीब तीन क्विंटल ही निकले। शाम को जब पति गेहूं लेकर घर आए और कहा कि कंबाइन के दो हजार रुपये कहां से देंगे। इतना कहने के बाद उन्होंने सीने में दर्द की शिकायत की। उसने सीने में तेल लगाकर सिंकाई की। सुबह फिर दर्द हुआ तो हालत  खराब हो गई। उन्हे बरेली ले जा रहे थे कि रास्ते में उसकी मौत हो गई। प्रधान पति वीरेंद्र सिंह, सुरेश पाल सिंह, द्रगपाल सिंह आदि ने बताया कि राजमंगल पर कर्ज था। गेहूं की फसल भी खराब हो गई। इसी कारण उसकी मृत्यु हो गई। मृतक की पत्नी समेत पांच बेटे-बेटियों का रो-रो कर बुरा हाल है। सूचना पर पहुंचे लेखपाल मुनब्बर हुसैन ने कहा कि मृतक के परिवार को हर संभव सहायता दिलाई जायेगी।

केस-चार
खन्नौत नदी में कूदकर मान सिंह ने दी जान
रौसर कोठी। रामचंद मिशन थाना क्षेत्र के गांव चौढ़ेरा निवासी मान सिंह की हरदोई जिले मेें शामिल पड़ोस के गांव मानपारा में तीन बीघा खेती है। ग्राम प्रधान नानक चंद्र ने बताया कि दो दिन पहले मानपारा से लौटे मान सिंह फसली नुकसान से काफी व्यथित थे। रविवार को सुबह वह साझे में फसल कटाई करने के लिए दनियापुर के एक किसान के खेत पर गए और कुछ देर बाद गांव के पास बह रही खन्नौत नदी में छलांग लगा दी। यह नजारा देख आसपास केखेतों पर मौजूद लोगों ने शोर मचाया, लेकिन नदी से निकाले जाने तक उनकी सांसें थम चुकी थीं। मृतक अपने पीछे पत्नी राम जानकी और सात बेटे-बेटियां छोड़ गया है। ग्राम प्रधान ने घटना की इत्तला लेखपाल को दे दी है। 
केस-पांच

फसली नुकसान से राम सिंह का दम निकला
निगोही। गांव बझेड़ा-बझेड़ी के राम सिंह ने दस बीघा जमीन में खेती के लिए ग्रामीणों से 40 हजार रुपये कर्ज लिया। स्टेट बैंक का एक लाख रुपये कर्ज उस पर पहले से चढ़ा था। सयानी हो रही बेटी लक्ष्मी की शादी की भी चिंता थी। पत्नी तुलसी देवी के अनुसार छह बीघा खेत में सिर्फ तीन क्विंटल गेहूं निकलने पर वह उदास मन से घर लौटे। अनमने तरीके से खाना खाकर लेट गए और सुबह बिस्तर पर मृत मिले। इससे परिवार में कोहराम मच गया। तिलहर के एसडीएम पद्म सिंह का कहना है कि राम सिंह श्वांस के रोगी थे और उनकी मौत बीमारी से हुई।

केस-छह
पैदावार कम निकली तो राघवेंद्र की रुक गईं सांसें
मिर्जापुर। क्षेत्र के गांव औरंगाबाद निवासी 52 वर्षीय किसान राघवेंद्र कुल डेढ़ एकड़ जोत के किसान थे। एक पैर से विकलांग राघवेंद्र खेती करके किसी तरह परिवार का गुजारा कर रहे थे। धान की फसल खराब हो जाने से परेशान राघवेंद्र ने बैंक से कर्ज लेकर गेहूं की फसल तैयार की। फसल अतिवृष्टि से खराब हो जाने के बाद भी उन्हें खाने भर को गेहूं मिल जाने की उम्मीद थी, लेकिन जब गेहूं की थ्रेसिंग करवाई तो डेढ़ एकड़ में सात क्विंटल मात्र गेहूं देख खलिहान में ही राघवेंद्र गश खाकर गिर पड़े।
गांव परिवार के लोग जब तक उन्हें किसी डाक्टर के पास ले जाते, तब तक उनकी मृत्यु हो गई। राघवेन्द्र के परिवार में पत्नी रीना व दो नाबालिग पुत्रों का रो रोकर बुरा हाल है। पत्नी रो रोकर कह रही थी कि अब कैसे होगी परिवार की गुजर और कैसे अदा होगा बैंक का कर्ज। ग्राम प्रधान मीनाक्षी सक्सेना ने मृतक को सरकारी सहयता दिये जाने की मांग डीएम से की है।
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