बड़ा हरेवा गांव में सोमवार को राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष जरीना उस्मानी पीड़िताओं से मिलने पहुंचीं। उन्होंने पीड़िताओं के जख्मों पर मरहम तो लगाया, लेकिन साथ में पुलिस को क्लीन चिट भी दे दी। उन्होंने पीड़ित महिलाओं से अकेले में बात करके घटना की सच्चाई को जाना और उनकी हरसंभव सहायता करने का आश्वासन दिया।
जरीना उस्मानी दोपहर करीब सवा तीन बजे आयोग की सदस्य एवं जिले की प्रभारी असमां सिद्दीकी के साथ लखनऊ से सीधे बड़ा हरेवा गांव पहुंचीं। उन्होंने पीड़िताओं को बुलाकर उनकी आपबीती सुनीं तो व्यथित हो उठीं। उन्होंने पीड़ित महिलाओं को दिलासा देते हुए कहा कि उनकी हरसंभव मदद की जाएगी। उस्मानी ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि बेहद शर्मनाक घटना थी।
आयोग की अध्यक्ष उस्मानी ने गांव में मौजूद मीडिया कर्मियों और बाद में मुख्यालय पर आकर पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में पत्रकारों से वार्ता करते हुए समाज की संवेदनहीनता पर भी सवाल खड़ा किया। उन्होंने कहा कि आरोपी और पीड़ित पक्ष के अलावा गांव में गुटबाजी से अलग रह रहे लोगों ने पुलिस को समय से इत्तला दे दी होती तो महिलाओं के साथ इतना शर्मनाक अत्याचार नहीं होता।
आयोग की अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकरण में मीडिया की भूमिका काबिल-ए-तारीफ है क्योंकि सुबह साढ़े आठ बजे हुई घटना की जानकारी पुलिस को मीडिया के माध्यम से शाम करीब चार बजे हुई। इसके बाद पुलिस गांव में पहुंची। इस बीच, गांव के लोग चाहते तो महिला हेल्प लाइन 1090 और 100 नंबर पर पुलिस को सूचना दे सकते थे।
उन्होंने पुलिस को यह कहते हुए क्लीन चिट दी कि पुलिस ने इस मामले की जानकारी होने के बाद तात्कालिक कार्रवाई में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। इस प्रसंग में इंस्पेक्टर और हल्का दरोगा को निलंबित किए जाने की वजह पूछे जाने पर उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि इलाके में हुई इतनी बड़ी घटना के लिए पुलिस कहीं न कहीं तो जिम्मेदार है ही, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई।
आयोग की अध्यक्ष के अनुसार पीड़ित महिलाओं से अकेले में पूछताछ करने पर कुछ ऐसी बातें निकलकर आई हैं जो पुलिस की जानकारी में नहीं हैं। उन्होंने कहा कि प्रकरण की जांच जारी है और आरोपियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। उस्मानी ने बंडा क्षेत्र में किशोरी को रंजिशन जहर पिलाए जाने की घटना का संज्ञान लेते हुए कहा कि आयोग इस मामले में भी जांच करके शासन से कड़ी कार्यवाही की संस्तुति करेगा।