सड़क हादसे में मौत का शिकार हुए मुख्तयार खां और तौसीफ उर्फ मुन्ना के शवों का शनिवार को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। दोनों गहरे दोस्तों ने आखिरी समय तक दोस्ती निभाई। पोस्टमार्टम के बाद दोनों के शव घरों में पहुंचते ही कोहराम मच गया।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला मोहम्मद जई निवासी मुख्तयार खां शाहबाद (हरदोई) के मोहल्ला मीरा बस्ती निवासी तौसीफ उर्फ मुन्ना के बीच कई सालों से गहरी दोस्ती थी। मुन्ना मोहम्मद जई में अपने चाचा फिरासत के घर रहते थे। मुख्तयार मकान बनाने के लिए ठेकेदारी करते थे, मुन्ना उनका हाथ बंटाता था। मुन्ना की पत्नी उजमा, बेटी सुमानिया और अनअमता के साथ शाहबाद में रहती थी। शुक्रवार को सुबह करीब दस बजे मुन्ना अपने परिवार से मिलने मुख्तयार के साथ आया था, इसके बाद वह चाचा के घर लौटने लगा। रात करीब साढ़े आठ बजे रौसरकोठी चौराहा के पास अज्ञात वाहन की चपेट में आकर दोनों की मौत हो गई थी। पुलिस ने मुख्तयार के जेब में मिले मोबाइल से शिनाख्त की और मृतकों के परिवार वालों सूचना दी थी। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस पर सुबह से ही बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई। पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद दोनों शवों को परिवार वालों के हवाले कर दिया। मुन्ना के शव का अंतिम संस्कार शाहबाद में उनके पैतृक कब्रिस्तान में किया, जबकि मुख्तयार के शव को शहर के कब्रिस्तान में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।
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शव घर पहुंचने पर मचा कोहराम
पोस्टमार्टम के बाद मुख्तयार का शव उनके घर पर पहुंचने पर कोहराम मच गया। पत्नी अंजुम, बेटा शेखू, साहिल, शालू, बेटी शादमा और रिंकी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रिश्तेदारों और मोहल्ले वालों की काफी भीड़ जमा हो गई।