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ढाईघाट में साले-बहनोई की गंगा में डूबकर मौत

Fri, 29 May 2015 12:15 AM IST
शाहजहांपुर
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गंगा दशहरा के पर्व पर फर्रुखाबाद जिले के ढाईघाट में साले-बहनोई की डूबकर मौत हो गई। मिर्जापुर पुलिस के सहयोग से एक दर्जन से अधिक गोताखोरों ने लगभग डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद दोनों के शव बाहर निकाले। शमशाबाद थाने की पुलिस ने दोनाें के शवों को कब्जे में ले लिया है।
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गंगा दशहरा पर्व पर ढाईघाट गंगातट पर बृहस्पतिवार को मेला लगा। इसमें शाहजहांपुर जिले के अलावा फर्रुखाबाद,मैनपुरी,बदायूं,हरदोई,लखीमपुर आदि जिलों से हजारों श्रद्धालु गंगा मइया में स्नान करने आए थे। गंगा के दक्षिणी किनारे पर ऊंची पहाड़ी होने के कारण गंगा के दक्षिण तरफ लगने वाला मेला भी पैंटून पुल से उत्तरी किनारे पर आ गया था। इससे गंगातट पर हजारों की भीड़ लग गई। मेले में सुरक्षा की दृष्टि से मिर्जापुर पुलिस केे साथ ही फर्रूखाबाद जिले की शमशाबाद थाने की पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।
सुबह करीब छह बजे शमशाबाद थाने के गांव खुड़िना खार निवासी घासीराम जाटव का 19वर्षीय पुत्र राजन अपने साले गांव कितियापुर थाना तालगांव जिला कन्नौज निवासी 13 वर्षीय विजय लक्ष्मण पुत्र वीरेन्द्र कुमार के साथ ढाईघाट गंगा स्नान के लिए आये थे। गंगा के दक्षिणी किनारे गंगा की ऊँची पहाड़ी और गंगा मे गहराई अधिक होने के कारण दोनो पैैैँटून पुल से उतरकर गंगा के उत्तरी किनारे पर आ गये। हालांकि पुलिस ने पैंटून पुल से पश्चिम के घाटों को गहराई अधिक होने के करण निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया था और पुलिस की ड्यूटी भी लगा दी थी। फिर भी 13 वर्षीय विजय लक्ष्मण पुलिस की नजर बचाकर गंगा मे कूद गया। गहराई अधिक होने के कारण वह डूबने लगा।
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साले बिजय लक्षमण को डूबता देख बहनोई राजन ने उसे बचाने के लिए गंगा मे छलांग लगा दी, लेकिन गहराई अधिक होने के करण वह भी डूबनेे लगा। प्रत्यक्षदर्शी जबतक कुछ समझ पाते तबतक दोनो डूब गये। मिर्जापुर एसओ बृजकिशोर मिश्र व एसआई कुलदीप कुमार ने तुरन्त एक दर्जन से अधिक गोताखोरों को लगाकर दोनाें की तलाश करवाई। गोताखोरों के अथक प्रयास के करीब डेढ़ घंटे बाद दोनों के शव पानी में डूबे हुए मिले। दोनाें शव मिल जाने पर शमशाबाद पुलिस ने कब्जे मे लेे लिया है।

मेले में अधिक भीड़ के कारण हुआ हादसा
मिर्जापुर। ढाईघाट मे गंगा के दक्षिणी किनारे पर ऊंची पहाड़ी और गहराई अधिक होने के कारण पूरा मेला पांटून पुल से उतर कर उत्तरी किनारे पर आ गया था। जिससे गंगातट पर हजारों की भीड़ जमा हो गयी थी। चूंकि गंगा के दक्षिणी किनारे पर लगने वाले मेले की सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी फर्रूखाबाद प्रशासन की थी। मेले मे अनुमान से अधिक भीड़ जुट जाने के कारण सुरक्षा व्यवस्था कमजोर पड़ गयी। वार्डर के कारण मिर्जापुर थाने की पुलिस का सहयोग भी दो किशोरों की मौत को बचा नहीं सकी।
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