फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

संपत्ति की खातिर भाई ने ही करा दी वासुदेव की हत्या

Fri, 15 Dec 2017 12:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो शाहजहांपुर।
विज्ञापन
murder - फोटो : amar ujala
विज्ञापन
विश्वासपात्र दोस्त को पचास हजार की सुपारी दी थी
विज्ञापन

हत्या के बाद जलाए शव के अवशेष गेंहू के खेत से किए गए बरामद
हत्या में शामिल मृतक के भाई सहित तीन आरोपी गिरफ्तार

थाना जलालाबाद क्षेत्र के गांव डोलापुर निवासी वासुदेव का चार दिसंबर को अपहरण नहीं हुआ था, बल्कि उसके भाई पूर्व प्रधान ने सुनियोजित षडयंत्र के तहत उसकी हत्या करवा दी थी। पुलिस ने इस मामले में शामिल तीन लोगों को गिरफ्तार कर घटना का खुलासा कर दिया है। इस घटना में शामिल एक आरोपी अभी भी फरार है। पुलिस उसकी तलाश में जुटी है। पुलिस ने बृहस्पतिवार को गड्ढे में दबे जले हुए शव के अवशेष व आला कत्ल बरामद कर लिया।
घटना का खुलासा करते हुए एएसपी ग्रामीण सुभाष चंद्र शाक्य ने बताया कि वासुदेव ने अपने हिस्से के अलावा और जमीन खरीदी थी। मौजूदा समय में उसके पास करीब 70 बीघा जमीन थी। वासुदेव के सबसे बड़े भाई पूर्व प्रधान रामनिवास यादव को लगा कि वासुदेव अपनी जमीन दूसरे भाई संतराम के बेटों के नाम कर देगा। इसी के चलते उसने भाई वासुदेव की हत्या की साजिश रच डाली। उसने इस काम के लिए वासुदेव के विश्वास पात्र गांव हरेवा निवासी अजय कुशवाहा को पचास हजार रुपये में तैयार कर लिया। बयाना के तौर पर पांच हजार रुपये दे दिए। तय योजना के मुताबिक अजय ने गांव के ही अपने साथी धीर सिंह और बजरंगबली को खेत में लगे यूकेलिप्टस कटवाने के लिए बुला लिया। रात दस बजे अजय ने खेत में पानी लगाने के बहाने वासुदेव को फोन करके बुलवा लिया। जैसे ही वासुदेव खेत पर पहुंचा अजय ने कुल्हाड़ी से वार कर उसे गिरा लिया और साथियों की मदद से उसकी गर्दन को डंडे से दबाकर हत्या कर दी। इसके बाद तीनों वासुदेव के शव को उठाकर पास में ही स्थित शमशान घाट पर ले गए और पुआल के ढेर में शव को रखकर उसमें आग लगा दी। अगली रात यह तीनों दोबारा उसी स्थान पर पहुंचे और शव के बचे अधजले टुकड़ों को गेंहू के खेत में गड्ढ़ा करके दफन कर दिया। मामले की सात दिसंबर को रिपोर्ट अपहरण में अज्ञात लोगों के खिलाफ दर्ज होने पर पुलिस वासुदेव की बरामदगी में जुटी थी। सर्विलांस की मदद से पुलिस ने धीरसिंह को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ शुरू की तो एक-एक कर घटना के तार जुड़ते चले गए। इसके बाद पुलिस ने रामनिवास, अजय को भी गिरफ्तार कर लिया और उनकी निशानदेही पर बृहस्पतिवार को गेंहू के खेत में जमीन में दफन जले शव के अवशेष और हत्या में प्रयुक्त कुल्हाड़ी भी बरामद कर ली। 
विज्ञापन


अजय को प्रधानी का चुनाव भी लड़वाया था वासुदेव ने
डोलापुर गांव से कुछ दूरी पर पश्चिम दिशा स्थित गांव पूर्वी हरेवा का अजय कुशवाहा वासुदेव का विश्वासपात्र मित्र था। गांव वालों के मुताबिक यदि रात में भी अजय का फोन आ जाए, तो वासुदेव उसके घर पहुंच जाता था। प्रधान पद के चुनाव में अजय ने 
साधू जैसे थे हमारे चाचा
वासुदेव की हत्या हो जाने की खबर पाकर संतराम के बेटे अमित व सुमित के अलावा बेटी प्रमिला गश खाकर गिर पड़े। छोटी सी उम्र में पिता पहले पिता और बाद में मां की मौत हो जाने के बाद वासुदेव ने ही इन सबकी परवरिश की और बड़े बेटे अमित व प्रमिला की शादी भी की। वासुदेव की मौत से दुखी अमित ने कहा कि उसके चाचा साधू की तरह थे। वह उनका सबका बहुत ख्याल रखते थे। उन्होंने उन लोगों को कभी भी किसी बात की कमी महसूस नही होने दी।

दूसरों को फंसाने की थी साजिश
चार दिसंबर की रात करीब दस बजे वासुदेव खेत पर पानी लगाने गए थे। जब वह वापस घर नहीं लौटे, तो सात दिसंबर को वासुदेव के बड़े भाई पूर्व प्रधान रामनिवास यादव के बेटे पुष्पेंद्र की ओर से पुलिस को दी तहरीर दी गई। जिसमें कहा गया कि उसके चाचा वासुदेव का अपहरण कर लिया गया है। तहरीर में गांव के ही कुछ लोगों पर वासुदेव का अपहरण कर लेने का आरोप लगाया गया था। मामले की गंभीरता को देखते अपहरण की धाराओं में मुकदमा तो पुलिस ने दर्ज कर लिया लेकिन अपहरण की बात पुलिस के गले नही उतर रही थी। एसपी केबी सिंह ने सीओ के नेतृत्व में क्राइम ब्रांच टीम को लगाकर घटना के खुलासे के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन


भाइयों के बच्चों को पालना पड़ गया भारी
वासुदेव पांच भाई थे। उसकी शादी नहीं हुई थी। चौथे नंबर के भाई संतराम की मौत के बाद वासुदेव संतराम की पत्नी के साथ रहने लगे। संतराम के दोनों बेटों अमित व सुमित के अलावा एक लड़की प्रमिला की परवरिश भी उन्होंने की। कुछ महीना पहले संतराम की पत्नी की भी मौत हो गई।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें