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एक करोड़ की खातिर दो भाइयाें ने कराई साहूकार की हत्या

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एक करोड़ की खातिर दो भाइयाें ने कराई साहूकार की हत्या 
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तिलहर के बहुचर्चित साहूकार महेश नागपाल उर्फ भूरे पंजाबी की बीते पांच अप्रैल की शाम को गोली मारकर की गई हत्या का बुधवार को पुलिस ने खुलासा कर दिया। इस हत्या का साजिश कर्ता ईंट भट्ठा मालिक मुमताज और दो सुपारी किलर हालांकि अब भी पुलिस के हत्थे नहीं लगे हैं लेकिन घटना को अंजाम देने में शामिल रहे भट्ठा मालिक के भाई इम्तियाज समेत चार को धर दबोचा। पूछताछ में चारों ने पुलिस को बताया कि भट्ठा मालिक बंधुओं ने हत्या की साजिश रची थी क्योंकि दोनों पर भूरे पंजाबी का कुल करीब एक करोड़ रुपये कर्ज था एवं जिसे लेकर घटना से कुछ दिन पहले दोनों पक्षों में तेज तकरार हुई थी। इस मर्डर के लिए सुपारी किलरों को कुल तीन लाख रुपये दिए गए थे। 
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एसपी डॉ. मनोज कुमार ने बुधवार को मीडिया को बताया कि हत्या के दिन से ही लग रहा था कि महेश नागपाल की हत्या ब्याज के लेनदेन को लेकर की गई है। मृतक की डायरी में कुछ बड़े बकाएदारों के नाम मिले थे। उसी बिना पर सीओ तिलहर डॉ. कृष्ण गोपाल यादव के नेतृत्व में एक टीम का गठन करके जांच शुरू की गई थी। इस मामले में तिलहर क्षेत्र के गांव बिलहरी निवासी पूर्व प्रधान और साबरी ईंट ब्रिक फील्ड के मालिक मुमताज और उसके भाई इम्तियाज पर महेश नागपाल उर्फ  भूरे का लगभग एक करोड़ रुपया बकाया था। इसमें से 77 लाख रुपये की मूल रकम मुमताज और पांच लाख 30 हजार रुपये  इम्तियाज पर बकाया था जबकि शेष राशि ब्याज की थी। पड़ताल में पाया गया कि मार्च 2015 से दोनों ने ब्याज का एक भी पैसा नहीं दिया था। बीते होली के त्यौहार पर मूल तो मूल और ब्याज भी अदा नहीं करने पर भूरे पंजाबी ने दोनों भाइयों को खरीखोटी सुनाई थी और वह भी उनके भट्ठे पर जाकर। भट्ठे पर कई मजदूर भी मौजूद थे और दोनों भाइयों को साहूकार के तकादे का वह अंदाज नागवार गुजरा था। दोनों ने साहूकार को शांति से बात करने को कहा था लेकिन वह अपने ही रौ में थे। उसी पर दोनों पक्षों में तीखी तकरार भी हुई। साहूकार ने अपना पाई-पाई हर हाल में किसी भी तरह वूसल लेने की बात कही थी। इससे तिलमिलाए दोनों भाइयों ने साहूकार को ही रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली। 
इसकी जिम्मेदारी दोनों भाइयों ने अपने भट्ठे के मुनीम निगोही क्षेत्र के गांव जिंदपुरा निवासी भूरे बक्श को सौंपी जिसने अपने गांव के ममेरे भाई शमशेर से इस बारे में बात कर मोटी कमाई का लालच दिया। शमशेर ने पीलीभीत के बिलसंडा थाना क्षेत्र के पहाड़गंज निवासी रईस और वशी उर्फ पहलवान से साहूकार की हत्या के लिए तीन लाख में सौदा तय किया किया था एवं एक लाख रुपये पेशगी दी गई। घटना के दिन भूरे बक्श उसके सहयोगी बजरुद्दीन और शमशेर के साथ धीरू की चक्की के पास जाकर दोनों को भूरे पंजाबी की पहचान कराई थी। इसी दिन दोनों ने भूरे पंजाबी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। घटना के बाद दोनों भट्ठे पहुंचे थे और बाकी की रकम लेने के बाद अपने घर चले गए थे। गिरफ्तार आरोपियों में मुनीम भूरे बक्श, शमशेर, इम्तियाज और बजरूद्दीन शामिल हैं। कोर्ट के निर्देश पर चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
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पहचानने के कुछ देर बाद की घटना को दिया अंजाम
बकौल भूरे बक्श हत्या वाले दिन उसने पंजाबी कालोनी स्थित एक चक्की पर बैठे भूरे पंजाबी को हत्याराें को दिखाया था। घासीराम वस्त्र भंडार के निकट खड़े होकर भूरे पंजाबी की लोकेशन वशी और रईस को दी थी। उसके बाद से हत्यारे बराबर साहूकार के पीछे लग गए और मौका लगते ही बीच वाले फाटक के पर घटना को अंजाम दे दिया।

पुलिस से बचने को नए मोबाइल और सिम किए इस्तेमाल
हत्या की साजिश के दौरान वशी और भूरा ने सूचना का आदान-प्रदान करने के लिये दो नए मोबाइल और दो नए सिम खरीदे थे। हत्या करने के बाद भूरा ने दोनाें मोबाइल व सिम तोड़कर फेंक दिए। जब सर्विलांस के माध्यम से दोनाें मोबाइल ट्रेस किए गए तो दुबारा उनकी लोकेशन नहीं मिल सकी, लेकिन बाद में एक अन्य मामले में वांछित शमशेर व भूरा को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया तो पूरे मामले की परत एक - एक कर खुलती चली गई।

खुलासा करने वाली टीम
भूरे पंजाबी हत्याकांड के खुलासा करने में तिलहर थाना प्रभारी अरूण कुमार सिंह, एसआई अनुज कुमार तिवारी और संजय कुमार शुक्ला, कांस्टेबल खालिद खां, शाहिद अली, आकाशदीप और अखिलेश कुमार के साथ क्राइम ब्रांच के कांस्टेबल महेंद्र कुमार और मेंहदी हसन शामिल थे।
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