इसे विधि का विधान नहीं तो और क्या कहें, कि भागवत कथा के कलश विसर्जन के लिए गईं तिलहर क्षेत्र के गांव कुआंडाडा के लोगों की मुंहबोली ‘बुआजीÓ राजरानी गंगातट से जीवन भर के लिए दुनिया उजड़ने का संताप लेकर लौटीं हैं। बुआजी के घर के दोनों चिराग (दो नाती) बुझने के साथ ही रोशनी की दोनों किरणें (नातिनें) भी इस दुनिया से चली गई हैं।
तिलहर थाना क्षेत्र के गांव कुआंडाडा की राजरानी पत्नी रामदीन अपने मायके में ही रहती हैं। इसलिए गांव वालों के बीच उन्हें Òबुआ जीÓ का खिताब मिला हुआ है। बुआ जी हर साल गांव में स्थित देवस्थान पर भागवत कथा का आयोजन कराती हैं। इस साल उनका 12वां आयोजन 16 जून से शुरू होकर 22 जून तक चला था। बुधवार को वह कलश, हवन की भस्म और पूजा सामग्री का विसर्जन करने के लिए वह फर्रुखाबाद स्थित घटियाघाट गंगा तट पर परिवार एवं रिश्तेदारों सहित गई थीं।
घाट पर उनके बेटे हरिश्चंद्र के तीन बच्चे, बेटी अंशिका और बेटे रंजीत और आदेश सहित दूसरे बेटे कृपाराम की बेटी फूलकली की गंगा में डूबकर मौत हो गई। बुआ जी के दो पोते और तीन पोतियां थीं। इसमें से दो पोते और दो पोतियों की मौत हो गई। इससे उनके घर के दोनों चिराग तो बुझ ही गए, साथ ही उनके घर की रोशनी की दो किरणें भी चली गईं। केवल दो माह की एक नातिन जीवित बची। अपने घर को आंखों के सामने तबाह देखकर बुआ जी विक्षिप्त सी हो गईं।
गांव में हर आंख थी नम
चार बच्चे डूबकर मरने की खबर जिसने भी सुनी अवाक रह गया। हर गांव वाले की आंख नम थी। घटना की खबर मिलते ही बुआ जी के घर के बाहर गांव वालों की भीड़ एकत्रित हो गई, लेकिन घरवाले तो घटियाघाट पर मौजूद थे।