गत 12 सितंबर को अर्जुनपुर बरमौला गांव में भुवनेश्वर ने अपनी पत्नी और परिवार के उत्पीड़न से क्षुब्ध होकर आत्महत्या कर ली थी। मृतक के पिता ने अपनी पुत्रवधू सहित उसके मायके वालों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने की रिपोर्ट दर्ज करानी चाही तो पुलिस ने उसे डांटकर भगा दिया। इससे गुस्साए ग्रामीणों ने रोजा थाने का घेराव कर प्रदर्शन और नारेबाजी की, लेकिन पुलिस ने उनके विरोध को अनसुना कर दिया।
बुधवार को पुलिस की कार्यप्रणाली से आहत मृतक भुवनेश्वर के पिता प्रभुदयाल सहित तमाम ग्रामीणों ने एसपी बबलू कुमार से शिकायत कर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की। घटना के पांच दिन बाद भी पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई करने की बजाय पीड़ित पक्ष को ही धमका रही है।
बता दें कि 12 सितबंर को थाना क्षेत्र के भुवनेश्वर पुत्र प्रभुदयाल ने अपने ही घर के बरामदे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम कराया दिया। मृतक के पिता प्रभुदयाल का आरोप है कि हाल ही में सरही गांव की रंजना के साथ भुवनेश्वर की शादी हुई थी। शादी के बाद से ही रंजना और उसके मायके वाले भुवनेश्वर के साथ पैसो की मांग करते थे। मना करने पर उसके साथ मारपीट करते थे।
प्रभुदयाल ने एसपी को बताया कि रक्षाबंधन में रंजना घर का सारा जेवर और 20 हजार रुपये लेकर अपने मायके गई थी। 11 सितंबर को उसने बेटे भुवनेश्वर को फोन पर 50 हजार की मांग करते हुए बुला लिया। रुपये लेकर जब उसका बेटा ससुराल गया तो वहां उसके साथ मारपीट की गई। सारा जेवर भी रख लिया और उसको बंधक बनाए रखा। 12 सितंबर की सुबह किसी तरह से वह जान बचाकर आया और इसी बीच मोबाइल पर रंजना और उसके मायके वालों में अपशब्द कहे। इससे आहत होकर उसी समय भुवनेश्वर ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
आरोपियों की हिमाकत
में जुटे हैं दो सिपाही
अर्जुनपुर बरमौला में ग्रामीणों का गुस्सा यूं ही नहीं फूटा है इसके लिये रोजा थाने के दो सिपाही पूरी तरह से जिम्मेदार बताए जा रहे हैं। मृतक भुवनेश्वर के पिता प्रभुदयाल का आरोप है कि बेटे की मौत की जिम्मेदार उसकी पत्नी रंजना और मायके वाले हैं जिनसे ये सिपाही मिले हुए हैं और प्रभारी निरीक्षक को भी गुमराह कर रहे है।