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एनआरएमयू ने फूंका देवराय का पुतला

Tue, 30 Jun 2015 11:36 PM IST
रोजा।
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 औद्योगिक घरानों को रेल कारोबार देने की विवेक देवराय कमेटी की सिफारिशों के विरोध में एनआरएमयू के कार्यकर्ताओं ने बरसते पानी में जमकर हंगामा काटा। लोको प्रभारी कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। इस बीच पदाधिकारियों ने विवेक देवराय कमेटी का पुतला दहन भी किया।
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बता दें कि मोदी सरकार के गठन के बाद रेलवे को औद्योगिक घरानों और निजी क्षेत्रों के हाथ बेचने की तैयारी शुरू कर दी गई, जिसके लिए केंद्र सरकार ने देवराय कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी में पिछले महीने केंद्र सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है, जो रेलवे और रेलकर्मियों के हित में नहीं है। इसकी भनक रेलवे की मान्यता प्राप्त यूनियनों को लग गई।
इसी के विरोध में एआईआरएफ के निर्देश पर स्थानीय यूनियन के द्वारा 10 दिन का विरोध दिवस मनाया जा रहा था। मंगलवार का विरोध के दिवसों के अंतिम दिन नरमू की रोजा इकाई के अध्यक्ष जेके त्रिवेदी और सचिव अमित मिश्रा के अगुवाई में तमाम पदाधिकारी इकट्ठे हुए। सुबह दस बजे निर्माण कार्यालय बिजली अभियंता कार्यालय और लोको प्रभारी कार्यालय पर जमकर हंगामा काटा और बाद में लोको प्रभारी कार्यालय के सामने धरना देकर बैठ गए। धरना देर शाम तक जारी रहा है। धरना देने वालों में अवधेश सक्सेना, जेपी सिंह, अमर सिंह मीना, हरगोविंद, मो. शमीम, चंदन कुमार, डीके शुुक्ला, सरोज कांत मिश्रा, जगदीश तिवारी आदि मौजूद रहे।
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कमेटी के लोग नहीं जानते रेलवे की जमीनी हकीकत
देवराय कमेटी में औद्योगिक घराने के लोग हैं। इन्होंने कभी रेलवे में सफर ही नही किया, न ही रेलवे की तकनीकी और जमीनी हकीकत के बारे मे जानते हैं। वे रेलवे के निजीकरण की सिफारिश कर रहे हैं। इससे सामाजिक और रेलवे का आंतरिक ढांचा चरमरा जाएगा जो लोकतंत्र के लिए घातक है।
- अमित मिश्रा, सचिव, एनआरएमयू, रोजा

ये है देवराय कमेटी की सिफारिशों के कुछ अंश
0 तत्काल प्रभाव से भारतीय रेल में उदारीकरण की प्रक्रिया अपनाई जाए। रेलवे बोर्ड की संरचना में बदलाव हो एवं प्राइवेट लोगों को यात्री और मालगाड़ी चलाने एवं पूंजी निवेश की इजाजत हो।
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0 दो साल के अंदर रेलवे के मंडलो, जोनो का केंद्रीकरण किया जाए भारतीय रेल और केंद्र सरकार के बीच वित्तीय संबंध हो।
0 दो साल के बाद रेलवे के अस्पतालों, स्कूलों, निर्माण यूनिटों, उत्पादन इकाईयों या कारखानों को भारतीय रेल से अलग किया जाए।
0 तीन साल के बाद रेलवे एक्ट और रेलवे बोर्ड में व्यापक परिवर्तन हो और स्वतंत्र रेलवे रेग्यूलरिटी अथारिटी का गठन किया जाए।
0 पांचवें साल भारतीय रेल का रेलवे इंफ्रास्क्ट्रचर कॉरपोरेशन एवं ट्रेन आपरेटर दो भागों में बांटकर रेल बजट बंद किया जाए।
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