बंडा (शाहजहांपुर)। फर्जीवाड़ा कर कर्ज लेने के आरोपी एक बुजुर्ग की संदिग्ध हालात में मौत हो गई। परिवारवालों का आरोप है कि रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी के बाद से वह काफी परेशान रहते थे। वह पुलिस पकड़ लेगी, पुलिस पकड़ लेगी कह कर चिल्लाते रहते थे। मौत की सूचना पुलिस को दिए बिना ही अंतिम संस्कार कर दिया गया है।
गांव दिउहना के 65 वर्षीय रामस्वरूप ने गांव ढका घनश्याम स्थित बैंक ऑफ बड़ौदा से मई 15 में 4.20 लाख रुपये बतौर कर्ज लिया था। फरवरी 18 में बैंक प्रबंधक अशोक कुमार ने 32 लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी कर कर्ज निकाल लेने का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इस मामले में अब तक आठ नामजद जेल भेजे जा चुके हैं। दिउहना के रामस्वरूप भी रिपोर्ट में नामजद थे। पत्नी सुखरानी देवी का आरोप है कि चार नवंबर को पुलिस घर आई तो पति को रिपोर्ट दर्ज होने की जानकारी मिल सकी। पुलिस के जाने के बाद से वह लगातार पुलिस पकड़ लेगी, पुलिस पकड़ लेगी, चिल्लाते रहते थे। शुक्रवार को उनकी मौत हो गई। सुखरानी का आरोप है कि पास के ही गांव के एक दलाल ने कर्ज दिलवाने के बाद छूट मिल जाने की बात कहते हुए कर्ज दिलवाया था और कर्ज की 30 प्रतिशत रकम दलाल आदि ने हड़प ली थी। रामस्वरूप के पौत्र सुरेंद्र सिंह ने बताया कि चार नवंबर को पुलिस दादा को पकड़ने के लिए आई थी। दादा उसी दिन से दहशत में थे। शुक्रवार रात डर के कारण ही उनकी मौत हो गई।
दो बैंकों से लिया था कर्ज
बंडा। जिन किसानों पर रिपोर्ट दर्ज हुई है उन लोगों पे पहले बंडा के क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक से कर्ज ले रखा था। बाद में उसी भूमि पर ढका घनश्याम की बॉब शाखा से कर्ज लिया गया। आवेदन के साथ लगे शपथपत्रों में कर्ज लेने वालों ने लिखा था कि उन पर किसी अन्य बैंक का कर्ज नहीं है और कर्ज होगा तो सारी जिम्मेदार शपथ की होगी। बाद में 32 किसानों पर डबल कर्ज पनाया गया और मामला धोखाधड़ी का मानते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। इसमें रामस्वरूप का भी नाम था।
बैंक से धोखाधड़ी के मामले की विवेचना मैं स्वयं कर रहा हूं। रामस्वरूप के घर दबिश नहीं दी गई और न ही किसी किसान को प्रताड़ित किया गया है। रामस्वरूप की मौत की जानकारी नहीं है।
तेजपाल सिंह, एसओ बंडा