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हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर आधा घंटे तक हाईवे पर चक्का जाम

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बंडा (शाहजहांपुर)। ग्रामीण बाबूराम की मौत के मामले में हत्या की रिपोर्ट दर्ज न किए जाने से मंगलवार को पुलिस के खिलाफ लोगों का गुस्सा भड़क गया। परिजन और ग्रामीणों ने बंडा थाने के सामने करीब आधे घंटे तक हाईवे जाम रखा और जमकर हंगामा किया। हाईवे पर जमा लोग बाबूराम की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देकर करीब आधा घंटे में लोगों को समझाकर शांत कर सकी।
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बंडा थाना क्षेत्र गांव इंदलपुर निवासी बाबूराम का शव 12 अप्रैल की सुबह गांव से कुछ दूरी पर खेत में पड़ा मिला था। बेटे मोनू का आरोप है कि उसके पिता बाबूराम की हत्या की गई है। उनका कहना है कि एक रिश्तेदार युवक की मौत के मामले में उनके पिता पर कंबाइन मालिक राजीनामा कराने का दबाव बना रहे थे। मगर उनके पिता ने समझौता कराने से इनकार कर दिया। इसी खुन्नस में उसके पिता की हत्या कर दी गई। वारदात से पहले विरोधी पक्ष के लोगों ने जान से मारने की धमकी भी दी थी। बाबूराम के बेटा मोनू की ओर से हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर बंडा थाने में दी गई थी। पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने से पहले मामले की जांच कर रही है।
मंगलवार सुबह बाबूराम का अंतिम संस्कार रोक दिया गया। परिजन और तमाम ग्रामीण बंडा थाने के सामने जाकर हाईवे पर जमा हो गए और चक्का जाम कर हंगामा करने लगे। परिजन बाबूराम की हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग कर रहे थे। इसका पता लगने पर पहुंचे बंडा थाना प्रभारी ने लोगों को समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ शांत होने को तैयार नहीं थी। काफी देर समझाने के बाद थाना प्रभारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक बाबूराम की मौत फेफड़े खराब होने से हुई थी। साथ ही उन्होंने मामले की गहनता से जांच करने का आश्वासन दियसा। काफी समझाने पर करीब आधे घंटे बाद लोग शांत हुए। इसके बाद लोग अपने घरों को चले गए। इसके बाद अंतिम संस्कार किया गया।
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दो सप्ताह पहले रिश्तेदार के बेटे की हुई थी मौत
बाबूराम के साड़ू राजेंद्र प्रसाद भी इंदलपुर गांव में रहते हैं। 15 दिन पहले राजेंद्र प्रसाद का पुत्र अंकुश कंबाइन पर काम करने लखीमपुर गया था। वहां सात अप्रैल की रात अंकुश की संदिग्ध हालत में मौत हो गई थी। अंकुश के पिता का आरोप है कि कंबाइन मालिक के पुत्र ने अंकुश के सिर में रिंछ मार दिया था, जिससे उसकी मौत हुई थी। हालांकि परिजन के तहरीर देने पर बंडा और लखीमपुर के मैगलगंज थाने की पुलिस सीमा विवाद में उलझी रही। इसी मामले में विरोधी पक्ष के लोग समझौता कराने के लिए बाबूराम पर दबाव बना रहे थे।
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