शाहजहांपुर। गौरी प्रजाति के धान बीज से बालियों में दाना नहीं बनने की जांच के बाद कृषि विभाग ने बीज निर्माता कंपनी और विक्रेताओं के खिलाफ कड़ा कदम उठाया है। जिला कृषि अधिकारी डॉ. सतीश चंद्र पाठक ने मामले में अपने स्तर से की गई पड़ताल और विभागीय जांच टीम से मिली रिपोर्ट के आधार पर बीज निर्माता कंपनी और उसके सात सदस्यीय निदेशक मंडल समेत सात बीज विक्रेताओं समेत कुल 15 लोगों के खिलाफ बुधवार को थाना सदर बाजार कोतवाली में बीज अधिनियम 1966 की धारा 7, 9, 10 व 21 और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 3/7 के तहत एफआईआर दर्ज कराई है। रिपोर्ट में नामजद किए गए बीज विक्रेताओं पर आरोप है कि उन्होंने व्यवसायिक स्वार्थ पूर्ति के लिए जिले के किसानों को गुणवत्ताहीन घटिया बीज की बिक्री की।
177 किसानों के जांच टीम ने लिए बयान
गौरी धान बीज से बालियों में दाना नहीं पड़ने की पहली शिकायत कृषि विभाग को मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव रमापुर उत्तरी के 33 किसानों से मिली। जांच में किसानों की शिकायत सही पाए जाने पर विभाग कोई कार्रवाई करता कि गढ़िया रंगीन के 20 और जैतीपुर क्षेत्र के गांव करकौर के नौ अन्य किसानों ने भी अधिकारियों को न केवल लिखित प्रतिवेदन देकर यही शिकायत दोहराई, इस मामले में कार्रवाई और क्षतिपूर्ति नहीं कराए जाने पर आत्महत्या की चेतावनी दी। मामले की गंभीरता को देखते जिला कृषि अधिकारी ने चार सदस्यीय विभागीय जांच कमेटी गठित कर दी। इस टीम ने विभिन्न तहसीलों में भ्रमण कर 177 किसानों के खेतों का भौतिक स्थलीय निरीक्षण कर संबंधित किसानों के बयान भी दर्ज किए। कई पृष्ठ की जांच आख्या में निष्कर्ष दिया गया कि बीज की गुणवत्ता निमभन स्तर की पाई गई है। खेतों के निरीक्षण से स्पष्ट हुआ कि बालियों मेें दाना नहीं पड़ा है और ऐसी स्थिति में धान उत्पादन शून्य होगा।
कंपनी के निदेशकों का ऐसे लगा सुराग
यूपीपीसीएस वर्ष 2009 के बैच में चयनित होकर राज्य कृषि सेवा श्रेणी-2 मेें आए जिला कृषि अधिकारी इससे पहले एक बैंक मेें विजिलेंस अधिकारी के तौर पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं। घटिया बीज से फसली नुकसान की शिकायतें मिलने पर उन्होंने अपने स्तर से की गई पड़ताल के जरिए किसानों से इतना पता लगा लिया कि गौरी बीज औरंगाबाद (महाराष्ट्र) स्थित कंपनी कीर्तिमान एग्रोजेनेटिक्स लिमिटेड ने तैयार किया है। कंपनी निदेशकों के नाम-पते हासिल कर उन्हें आरोपी बनाने के लिए उन्होंने खुफिया अधिकारी का तौर-तरीका अपनाया। इसके लिए कृषि अधिकारी ने गौरी बीज पैकेट के रैपर पर अंकित सीआईएन (कंपनी इंडेक्स नंबर) नंबर भारत सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स की अधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया तो सात सदस्यीय निदेशक मंडल की कुंडली स्क्रीन पर आ गई।
निर्माता कंपनी ने कीं कई अनियमितताएं
बीज निर्माता कंपनी की वैधता जांचने के लिए कृषि अधिकारी ने अपर कृषि निदेशक से पत्राचार कर कंपनी को जारी किया गया बीज निबंधन पत्र उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। इस पर कृषि निदेशालय से अवगत कराया गया कि कीर्तिमान एग्रोजेनेटिक्स लिमिटेड को राज्य सरकार से बीज बिक्री का लाइसेंस जारी किया, लेकिन उसका वर्ष 2012 से नवीनीकरण नहीं कराया गया है। निदेशालय के इस उत्तर से गौरी बीज की प्रदेश में बिक्री गैरकानूनी प्रमाणित हो गई।
इनको बनाया गया आरोपी
एफआईआर में निर्माता कंपनी समेत निदेशक मंडल में शामिल नांदेड़ (महाराष्ट्र) निवासी गिरधारीभाई दहियाभाई पटेल, जनक के पेशराना, दर्शित सुनील भाई शाह, रिकिन हंसमुखभाई मेहता, योगेश कुमार मनुभाई पटेल, अशोक भारद्वाज और मोहित टांक को आरोपी बनाया गया है। इसी रिपोर्ट में जो बीज विक्रेता प्रतिवादी बनाए गए हैं, उनमें बरेली स्थित जय दुर्गा बीज भंडार के संचालक पुष्पेंद्र माहेश्वरी, मेसर्स सुनील पाठक बीज भंडार के सुनील पाठक, फरीदपुर (बरेली) स्थित सुनील कुमार बीज भंडार के सुनील अग्रवाल, चंदौसी (संभल) स्थित बालाजी ट्रेडर्स के मयंक अग्रवाल, किसान कृषि रक्षा केंद्र गढिय़ा रंगीन के नत्थू लाल गुप्ता, वहीं स्थित जय मां बीज भंडार के अमित कुमार और जैतीपुर स्थित कश्यप एग्रो एजेंसी के संचालक विजय कुमार शामिल हैं।
महाराष्ट्र स्थित कंपनी के निदेशक वहां की सरकार में ऊंची पहुंच रखते हैं। रिपोर्ट दर्ज होने पर उनमें खलबली मच गई है और वह बार-बार फोन कर खुद पर लगे आरोपों के बारे में जानना चाहते हैं। गौरी बीज इससे पहले मैने नहीं सुना था। मामले में बीज विक्रेताओं के साथ कंपनी के निदेशक मंडल न केवल सजा भुगतनी होगी, कंपनी से किसानों को फसली क्षति का पूरा मुआवजा भी दिलाया जाएगा।
- डॉ. सतीश चंद्र पाठक, जिला कृषि अधिकारी