शाहजहांपुर। गन्ना का सट्टा कराते समय अधिक रकबा दर्शाने के लिए विभागीय पर्यवेक्षकों को फर्जी खतौनियां प्रस्तुत करने वाले रोजा मिल क्षेत्र के आठ किसानों के खिलाफ बुधवार को रोजा, सेहरामऊ दक्षिणी और कांट थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। डीएम के आदेश पर हुई कार्रवाई के बाद जिला गन्ना अधिकारी डॉ. खुशीराम ने बताया कि सर्वे सट्टा के सत्यापन और बाद में किसानों के घोषणा पत्र से मिलान करके की गई जांच मेें भावलखेड़ा एवं मिश्रीपुर क्षेत्र के आठ ऐसे किसान चिह्नित किए गए, जिन्होंने फर्जी खतौनियों का सहारा लिया। इन मामलों की विवेचना शुरू होने पर फर्जी खतौनियां जारी करने मेें लिप्त राजस्व कर्मियों और किसानों को फर्जीवाड़ा के लिए प्रेरित करने वाले असली गन्ना माफिया भी उजागर हो सकते हैं।
जिन किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है, उनमें ग्राम-बिसरा भिठौली निवासी अकिला देवी पत्नी रामवरन सिंह, जगतनरायन पुत्र जगदीश नरायन, सत्यदेव पुत्र जगदीश नरायन और रामवरन सिंह पुत्र अभिलाष सिंह के खिलाफ थाना-कांट में, ग्राम-त्यूलक निवासी वीरपाल पुत्र शिवलाल एवं बिजरानी पत्नी शिवलाल के खिलाफ थाना रोजा में और ग्राम नौसिया निवासी मान सिंह पुत्र राममिलन एवं ग्राम कहेलिया निवासी सुनील कुमार पुत्र बाबू सिंह के खिलाफ थाना सेहरामऊ दक्षिणी में रिपोर्ट दर्ज कराई गई हैं। रोजा सहकारी गन्ना विकास समिति केे ज्येष्ठ गन्ना विकास निरीक्षक डॉ. सुनील कनौजिया की ओर से कराई गईं एफआईआर में इन सभी पर निजी स्वार्थवश राजस्व अभिलेखों में छेड़छाड़ करके अधिक जमीन दर्ज कराने, कूटरचित ढंग से लाभ अर्जित करने, विभागीय कार्य में बाधा डालने, कृषक हितों को प्रभावित करने, फर्जी दस्तावेज/अभिलेख बनाकर असली के रूप में प्रस्तुत करने, समिति की सदस्यता के विपरीत काम करने, कानून व्यवस्था को प्रभावित करने आदि आरोपों के आधार पर सुसंगत धाराएं लगाई गई हैं।
इस वर्ष 1.70 लाख से ज्यादा किसानों ने 98522 हेक्टेयर में गन्ना की बुवाई की है। बीते माह सर्वे सट्टा के सत्यापन मेें लगभग तीन हजार ऐसे किसानों की छंटनी की जा चुकी है, जिन्होंने दो स्थानों से एक ही नाम पर सट्टे बनवा लिए थे। सत्यापन से शेष बचे किसानों के लिए बाद में गन्ना समितियों पर सट्टा प्रदर्शन मेले लगाए गए, लेकिन 10470 ऐसे किसान पाए गए, जो अपने सट्टा का सत्यापन कराने से कन्नी काट गए। हालांकि, गन्ना विकास समितियों पर लगे सट्टा प्रदर्शन मेलों मेें ऐसे तमाम किसानों ने रकबा की जांच और सत्यापन करा लिया है। इसके बावजूद जो किसान सट्टा कराने के बाद जांच प्रक्रिया मेें शामिल होने से रह गए, उनकी समितियों के स्तर से जांच जारी है।
पिछले पेराई सत्र में भी सर्वे सट्टा में गड़बड़ी के मामले पकड़े जा चुके हैं। जांच में पता चला कि गन्ना माफियाओं को लाभ पहुंचाने के लिए विभाग के पर्यवेक्षक भी रकबा मनमाने तरीके से दर्ज करने में लिप्त हैं। यह तथ्य सामने आने पर तीन गन्ना पर्यवेक्षकों के खिलाफ विभिन्न थानों में एफआईआर कराई गई थी। इस बार सर्वे सट्टा के समय से ही कई चरणों में जांच होने से लग रहा था कि सट्टा सर्वे में फर्जीवाड़ा पर रोक लगेगी, लेकिन रोजा सहकारी गन्ना समिति की जांच में आठ सट्टों में फर्जीवाड़ा सामने आने से माना जा रहा है कि अन्य समितियों (तिलहर एवं पुवायां) में भी ज्यादा रकबा दर्शाने वाले मामले जांच में सामने आ सकते हैं।
कई स्तर पर हुई जांच में दो समितियों से सदस्यता लेने वाले 833 और दोहरे सट्टे दर्ज कराने के बावजूद एक ही बैंक खाता दर्ज कराने अथवा डबल आधार कार्ड लगाने वाले 714 किसानों के नाम सदस्यता सूची से हटाए गए हैं। किन्हीं कारणों से सट्टा सत्यापन नहीं कराने वाले सभी किसान माफिया नहीं हैं क्योंकि ऐसे किसान जिले मेें संचालित लगभग 40 कोल्हुओं और क्रशरों (लघु शक्कर संयंत्रों) को गन्ना सप्लाई करते हैं। पुलिस विवेचना में वह चेहरे भी उजागर हो सकते हैं, जिन्होंने किसानों को फर्जी रकबा दर्शाने को उकसाने का काम किया है।
- डॉ. खुशीराम, जिला गन्ना अधिकारी