पुवायां। जन्म प्रमाणपत्र में चार साल के बच्चों की उम्र 104 साल करने के मामले में हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के कोर्ट से उस आदेश पर रोक लगा दी, जिसमें कोर्ट ने प्रधान और सचिव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज के आदेश दिए थे। हाईकोर्ट ने इस मामले के लिए सुनवाई की तिथि तीन मार्च तय की है।
गांव बेला निवासी पवन कुमार ने ग्राम प्रधान प्रवीण मिश्रा और सचिव सुशील अग्निहोत्री पर आरोप लगाया था कि 30 जुलाई 2019 को वह अपने भतीजे शुभ और संकेत के जन्म प्रमाणपत्र बनवाने खुटार में सचिव के कार्यालय गए थे। सुविधा शुल्क नहीं देने पर नाराज सचिव ने प्रधान की शह पर शुभ की जन्म तिथि 13 जून 2016 के स्थान पर 13 जून 1916 और संकेत की जन्म तिथि छह जनवरी 2018 के स्थान पर छह जनवरी 1918 लिखकर प्रमाणपत्र जारी कर दिए थे। शिकायत पर प्रधान और सचिव ने गाली गलौज किया था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी। इस पर पवन ने बरेली में विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के न्यायालय में प्रार्थना पत्र देकर रिपोर्ट दर्ज कराने का आदेश देने की गुहार लगाई थी। कोर्ट से 20 दिसंबर 2019 को प्रधान और सचिव के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश हो गया। चार जनवरी को खुटार थाने के पैरोकार ने कोर्ट आदेश को रिसीव भी कर लिया। इधर आरोपी प्रधान प्रवीण मिश्रा ने हाईकोर्ट की शरण ली थी। हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाते हुए सुनवाई के लिए तीन मार्च की तिथि तय की है।
रिपोर्ट दर्ज करने का कोर्ट का आदेश चार जनवरी को रिसीव होने की जानकारी नहीं है। यदि आदेश चार जनवरी को रिसीव हुआ है तो मामले को दिखवाया जाएगा कि इसमें किस स्तर से देरी हुई।
- तेजपाल सिंह, एसओ