शाहजहांपुर। अदालत ने विवेचक के बजाय दूसरे उपनिरीक्षक के केस डायरी के साथ पेश होने पर स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है। विवेचक और उपनिरीक्षक के साथ ही अदालत ने बगैर अग्रसारित किए आख्या भेजने पर तिलहर थाना प्रभारी का भी स्पष्टीकरण तलब किया है।
अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी दिनेश दिवाकर की कोर्ट में तिलहर थाने के एक मामले में प्रगति आख्या के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया। पत्रावली के अवलोकन से यह स्पष्ट हुआ कि 11 मार्च को अदालत ने यह आदेश दिया था कि विवेचक केस डायरी तथा स्पष्ट रिपोर्ट के साथ 16 मार्च को उपस्थित हों लेकिन विवेचक उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार ने खुद पेश होने की जगह उपनिरीक्षक नितिन मलिक को भेज दिया।
दस दिसंबर 2025 को केस दर्ज होने के बाद विवेचक के अनुपस्थित रहने के कारण मुकदमे में विवेचना में क्या प्रगति हुई है, इसका जवाब विवेचक ही दे सकते हैं। कोर्ट ने आदेश दिया कि उपनिरीक्षक नितिन मलिक अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें कि वह विवेचक न होते हुए भी किस हैसियत से केस डायरी व प्रगति आख्या लेकर न्यायालय के समक्ष उपस्थित हुए।
अदालत ने तिलहर थाना प्रभारी जुगल किशोर पाल से भी स्पष्टीकरण मांगा है कि यह आख्या बिना उनके अग्रसारण के न्यायालय के समक्ष क्यों प्रस्तुत की गई। थाने की कोई भी आख्या बगैर थाना प्रभारी के अग्रसारण के न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं की जानी चाहिए। इससे क्यों न यह निष्कर्ष निकाला जाए कि उनका उनके थाने पर कोई नियंत्रण नहीं है।
अदालत ने उपनिरीक्षक देवेंद्र कुमार से भी स्पष्टीकरण तलब किया है कि न्यायालय के आदेश की जानकारी होने के बावजूद वह नियत तिथि पर क्यों नहीं उपस्थित हुए। ऐसा प्रतीत होता है कि उन्हें अदालत के आदेश के अनुपालन में कोई रुचि नहीं है। क्यों न उनके विरुद्ध सुसंगत धाराओं एवं पुलिस अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत दंडित किया जाए। अदालत ने आदेश की प्रति एसपी और अपर पुलिस महानिदेशक, बरेली को भेजने के आदेश दिए हैं।
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दो दोषियों को सात-सात वर्ष का कारावास
शाहजहांपुर। मारपीट कर महिला को घायल करने के दो दोषियों को अदालत ने सात-सात वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है।
कलान थाना क्षेत्र के टड़ई गांव में खुशीराम और उसके भाई हरीराम ने 2020 में बदन सिंह की पत्नी सुनीता को लाठी-डंडे से पीटकर बुरी तरह से घायल कर दिया था। प्राथमिकी दर्ज करने के बाद पुलिस ने विवेचना की। अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया। अदालत में गवाहों के बयानात और साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय एडीजे-11 ने खुशीराम और हरीराम को सात-सात वर्ष के कारावास की सजा से दंडित किया। संवाद