शाहजहांपुर। फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम के अपर सत्र न्यायाधीश मोहम्मद कमर ने दुष्कर्म के एक मुकदमे में पीड़िता के मामा समेत तीन लोगों को आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये जुर्माने की सजा से दंडित किया है। इसी मुकदमे में पीड़िता की नानी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार चौक कोतवाली क्षेत्र की रहने वाली एक महिला पुलिस विभाग में कार्यरत है। उसका सामान उसकी मां के पास रहता था। महिला के जेवर पर मां और भाई की नियत खराब हो गई थी। उसके भाई की दुकान में दो नौकर रवि और पिंटू काम करते थे। वादिनी के मुताबिक 23 सितंबर, 2010 की रात नौ बजे आरोपी रवि, पिंटू, भाई और मां ने उसकी बेटी से कहा कि तुम्हारी मां का एक्सीडेंट हो गया है।
ये चारों लोग उसकी बेटी को धोखे से एक मकान में ले गए। यहां बंधक बनाकर रवि और पिंटू ने उससे दुष्कर्म किया। वहीं भाई ने फोन कर अपनी बहन को बताया कि उसकी बेटी कहीं चली गई है। रात में ही जब वह घर पहुंची तो उसके बेटे ने बताया कि नानी और मामा ने बेटी को रवि और पिंटू के साथ ले जाकर कहीं छुपा दिया है।
पीड़ित मां ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर 13 फरवरी, 2011 को अपने भाई, रवि, पिंटू के विरुद्घ चौक कोतवाली में आईपीसी की धारा 376, 406 और 506 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने मामा, रवि यादव और पिंटू रावत के विरुद्घ आरोप पत्र अदालत में भेजा। अपर सत्र न्यायालय में मुकदमा चलने के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर बहस के बाद नानी को अदालत में तलब किया गया।
अदालत में मुकदमा चलने के दौरान गवाहों के बयानात और सरकारी वकील संजीव कुमार सिंह के तर्कों को सुनने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी मामा, रवि यादव निवासी हुंडाल खेल और पिंटू रावत निवासी मोहल्ला मतानी को दोषी माना। तीनों को अदालत ने आजीवन कारावास और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। आरोपी नानी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।