शाहजहांपुर। ए-ग्रेड प्राप्त होने के बाद भी रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था में खामियां हैं। स्टेशन पर अनगिनत चोर दरवाजे होने के कारण आए दिन आपराधिक घटनाएं होती रहती हैं। मालगोदाम साइड से आने वाले अवैध वेंडर व संदिग्ध लोगों से रेल यात्रियों को सबसे अधिक खतरा है। सुरक्षा में चूक इतनी है कि रात तो छोड़िए, दिन में भी सुरक्षाकर्मी प्लेटफार्म पर नजर नहीं आते हैं।
बुधवार की देर रात एक मानसिक मंदित ने स्टेशन परिसर में आठ महीने की बच्ची को फेंककर मार डाला था। इससे लोगों को स्टेशन में खतरा महसूस होने लगा है। यहां पर कई भिखारी, मानसिक मंदित और संदिग्ध लोग बेरोकटोक घूमते रहते हैं। रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट से लेकर अंतिम छोर तक कुछ भी लेकर चले जाएं, कोई रोकने-टोकने वाला नहीं है।
मुख्य गेट पर मेटल डिटेक्टर भी नहीं लगा है। यहां पर पुलिस की ड्यूटी नहीं रहती है। स्टेशन से दाहिने मुड़ने पर जीआरपी थाना और उसके चंद कदम की दूरी पर आरपीएफ की पोस्ट है। इसके बीच में पार्सल घर है, जहां से लोग भी आते-जाते रहते हैं। इसके आगे पूर्वोत्तर रेलवे की तरफ से निकलने का रास्ता है जहां पर कोई रोक-टोक नहीं है।
टेलीफोन विभाग के आगे रेलवे लाइन के किनारे होते हुए अराजकतत्व स्टेशन से ढाका ताल की ओर निकल जाते हैं। प्लेटफार्म नंबर एक पर थाना होने की वजह से कुछ गनीमत है, लेकिन मालगोदाम की तरफ दीवार टूटी होने व कई रास्ते होने के चलते सबसे ज्यादा खतरा बना रहता है। इस ओर से संदिग्ध लोग व अवैध वेंडर आसानी से प्रवेश कर जाते हैं। प्लेटफार्म नंबर चार और पांच पर सबसे ज्यादा घटनाएं होती हैं।
यात्रियों को दूषित सामग्री परोस रहे वेंडर
मालगोदाम रोड पर बनीं दुकानों पर पूड़ी से लेकर कोल्ड ड्रिंक तक बनाई जा रहीं हैं। ट्रेन आने पर अवैध वेंडर आकर यात्रियों को दूषित सामग्री परोसकर आसानी से निकल जाते हैं। ट्रेनों के पायदान पर बैठे लोगों से मोबाइल छीनने की वारदातें भी इसी प्लेटफार्म पर अधिक होती हैं।
आरपीएफ-जीआरपी के कैमरों से नहीं मिलेगा सुराग
स्टेशन परिसर की सुरक्षा के नाम पर आरपीएफ और जीआरपी ने कैमरे लगवा रखे हैं। आरपीएफ के 40 कैमरों के डीवीआर में तकनीकी कमी होने के चलते रिकॉर्डिंग को सुरक्षित रखने की व्यवस्था नहीं है। इसी तरह जीआरपी ने आठ कैमरे कई वर्ष पहले लगवाए थे। इनमें छह खराब हो गए। मात्र कार्यालय परिसर के दो कैमरे संचालित हैं।
एक नजर
- 54 सिपाही जीआरपी के पास कार्यरत हैं।
- 44 सिपाही ट्रेनों में स्क्वॉयड ड्यूटी पर रहते हैं। 22 ट्रेनों में सुरक्षा टीम चलती हैं।
- 02 दरोगा थाने में कार्यरत, जिनकी ड्यूटी दिन और रात में लगाई जाती है।
जो संसाधन रेलवे पुलिस बल के पास मौजूद हैं, उसी से काम चलाया जा रहा है। प्रयास रहता है कि यात्रियों को बेहतर सुरक्षा व्यवस्था मुहैया कराई जाए।
- रेहान अली, इंस्पेक्टर जीआरपी