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गढ़ियारंगीन : एक महीने में 14 मौत, सैकड़ों बीमार फिर भी टेस्ट को नहीं तैयार

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जैतीपुर (शाहजहांपुर)। 15 हजार आबादी की ग्राम पंचायत गढ़ियारंगीन में तमाम लोग बुखार, खांसी, जुकाम के शिकार हैं लेकिन कोरोना टेस्ट कराने से कतराते हैं। गांव में पिछले एक महीने में 14 लोगों की मौत हो चुकी है तो 12 से ज्यादा सक्रिय कोरोना मरीज हैं। गांव में पीएचसी है लेकिन जांच कराने वाले मरीजों की संख्या बहुत कम है। कुछ लोगों को पहले बुखार आया फिर सांस लेने मे तकलीफ हुई और बाद में आक्सीजन लेवल इतना गिर गया कि मौत हो गई। इसके बावजूद लोग सबक नहीं ले रहे हैं और स्वास्थ्य विभाग भी अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहा है।
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गंदगी का अंबार
गढ़ियारंगीन भले ही ग्राम पंचायत हो लेकिन आबादी कस्बे जितनी है। यहां पर साफ-सफाई की व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है। गांव की गलियां गंदगी से पटी हुईं हैं। नालियां चोक हैं जिससे पानी सड़कों पर बहता है। गांव वाले बताते हैं कि 20 वर्षों से गांव में कभी मच्छरों को मारने के लिए दवाई का छिड़काव नहीं हुआ। पूरे गांव में केवल एक सफाईकर्मी है जिसके भरोसे 15 हजार की आबादी है। जबकि इतने बड़े गांव में कम से कम पांच सफाई कर्मी होने चाहिए।
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इन लोगों की हुई मौत
लालमुनी (45), भगतनी पत्नी रुस्तम (60), अनिल गुप्ता (45), निरंजन (65), जगदीश (62), राजाराम (70), लल्लू खां (60), मुबीना हसन पत्नी जाकिर खान (60), कालीचरण (48), चकुई (35), महिपाल (55), दीनानाथ (65), चांद बाबू पुत्र नूर हसन, संतोषी पत्नी नन्हें (38) की बुखार और अन्य बीमारियों से पिछले एक महीने में मौत हो चुकी है।
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पूरी ताकत से काम नहीं कर रही निगरानी समिति
ग्राम प्रधान लालू प्रसाद प्रजापति ने बताया कि गांव में निगरानी समिति में उनके अलावा गांव की आशा बहू और आंगनबाड़ी वर्कर है। वह और आशा बहू ही काम कर रहे हैं जबकि आंगनबाड़ी वर्कर काम पर नहीं आती है। इससे निगरानी समिति पूरी ताकत से काम नहीं कर पा रही है। निगरानी समिति के अन्य सदस्य भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। प्रशासन से भी मदद नहीं मिल रही है।
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ग्रामीणों की बात
गांव में बहुत गंदगी है जिससे मच्छरों का प्रकोप बहुत बढ़ गया है। निगरानी समिति में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता काम नहीं कर रही हैं। प्रशासन से अपील है कि गांव में फॉगिंग कराई जाए ताकि मच्छरों से निजात मिल सके। गांव को चार और सफाई कर्मी प्रदान किए जाएं।
- लालू प्रसाद प्रजापति ग्राम प्रधान
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गढ़िया रंगीन में सफाई कई महीनों से नहीं हुई है। इससे गांव में मच्छरों का प्रकोप बढ़ रहा है। गांव में कई लोग बीमार पड़े हैं लेकिन प्रशासन इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
-रामनिवास
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गढ़ियारंगीन की सड़कों की हालत ऐसी है कि गंदा पानी नाली में कम सड़कों पर ज्यादा बहता है। गांव के हालात बहुत खराब हैं। गांव में अभियान चलाकर सफाई का काम कराया जाए।
-द्वारिका प्रसाद
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गांव में कोरोना के बहुत मरीज निकल रहे हैं फिर भी गांव में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है ।गांव की नालियां चोक पड़ी हैं। एक सफाई कर्मी है। गांव में सफाईकर्मियों की संख्या बढ़ाई जाए।
-उदयभान सिंह
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गांव की सबसे बड़ी समस्या है गंदगी। केवल एक सफाई कर्मी के ऊपर पूरी जिम्मेदारी है। 15000 की आबादी वाले गांव में एक सफाई कर्मी से काम नहीं चल सकता। गांव में बीमारी बढ़ रही है। गांव में फॉगिंग और सैनिटाइजेशन कराया जाए।
-सुरजीत
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गढ़िया रंगीन पीएचसी में डॉ. फहीम शमशी की तैनाती है। ओपीडी बंद चल रही है। पीएचसी पर वैक्सिनेशन और कोरोना जांच का कार्य चलता रहता है। लोगों को जागरूक होने की जरूरत है। लोग निश्चिंत होकर जांच कराएं और दिक्कत होने पर दवाई लें ।
-डॉ. लईक अहमद, सीएचसी प्रभारी जैतीपुर
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सीतापुर गांव में फिर मिले चार कोरोना पॉजिटिव
खुटार। रेड जोन घोषित सीतापुर गांव में बुधवार को चार लोगों की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है। यहां अब 42 लोग कोरोना संक्रमित हैं। सभी का घर पर ही इलाज किया जा रहा है।
गौरतलब है कि 14 और 15 मई को गांव सीतापुर में 38 लोग कोरोना संक्रमित पाए गए थे। इसके बाद गांव को रेड जोन घोषित कर सील किया गया था और संक्रमित लोगों को दवा वितरित करने के साथ ही गांव के लोगों की जांच भी की गई थी। बुधवार को आई रिपोर्ट में चार और लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए। इसके अलावा गांव बेला में पांच, अठकोना में एक व्यक्ति की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई है।
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खुटार सीएचसी के एक कर्मचारी की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई है। कर्मचारी को होम आइसोलेट कर इलाज शुरू कर दिया गया है। संवाद
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