शाहजहांपुर। गांवों में कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। इसके मद्देनजर निगरानी समितियों की संख्या बढ़ा दी गई है। लेकिन इन समितियों में काम करने वाले सदस्यों की सुरक्षा के लिए न तो सैनिटाइजर दिया गया और न ही ग्लव्स और मास्क। इतना ही नहीं स्वास्थ्य परीक्षण के लिए पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मामीटर तक नहीं है। इसका असर सर्वे पर पड़ रहा है।
निगरानी समितियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गांवों में बाहर से आने वाले प्रवासी परिवारों की थर्मल स्कैनर से जांच करें। उनमें बुखार अथवा कोरोना जैसे अन्य कोई लक्षण दिखें तो तत्काल स्वास्थ्य विभाग की क्षेत्रीय आरआरटी को सूचित करें ताकि उनकी आरटीपीसीआर जांच कराई जा सके। निगरानी समितियों को जनपद की सभी 1069 ग्राम पंचायतों में प्रधानों के नेतृत्व में गठित किया गया है। वहीं 186 समितियां शहर में हैं। इनमें कोटेदार, लेखपाल, पंचायत सचिव, ग्राम रोजगार सेवक, आशा वर्कर और एएनएम को शामिल किया गया है। इन समितियों को प्रवासी परिवारों की जांच का कोई लक्ष्य नही दिया गया है। उनके लिए अलग से कोई बजट भी निर्धारित नही है। दावा है कि आशाओं और एएनएम को स्वास्थ्य विभाग की ओर से पल्स ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर उपलब्ध कराए गए हैं। हकीकत इससे अलग है। जिले में करीब 25 सौ आशाएं और करीब तीन हजार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं। निगरानी समिति में फ्रंटलाइन पर सबसे ज्यादा आशा ही सक्रिय हैं। इसके बावजूद थर्मल स्कैनर, पल्स ऑक्सीमीटर सिर्फ ग्राम पंचायत स्तर पर दिए गए हैं।
अगर एक ग्राम पंचायत में तीन गांव हैं और तीन आशाएं कार्यरत हैं तो ये सामान एक आशा के पास में ही होगा। ऐसे में आशाएं सिर्फ खानापूरी कर कागजी सर्वे कर लौट आती हैं। ये आशाएं अथवा आंगनवाड़ी कार्यकर्ता घर में जाकर नाम, मोबाइल नंबर, परिवार के सदस्यों की संख्या, बीमार व्यक्ति के बारे में पूछकर लौट आती हैं। इसके बाद दिनभर की रिपोर्ट ब्लॉक और जिला स्तर के अधिकारियों को दे देती हैं।
जिला पंचायत राज अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि निगरानी समितियों को संबंधित गांव में नियमित भ्रमण कर ग्रामीणों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।
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सभी आशाओं को पल्स ऑक्सीमीटर, थर्मल स्कैनर नहीं दिए गए हैं। ऐसे में आशाएं घरों में सिर्फ पूछताछ कर पाती हैं। पांच दिन का जब सर्वे कराया गया था तब मास्क और ग्लव्स दिए गए थे। अब आशाएं अपने खर्चे पर खुद की सुरक्षा करते हुए सरकारी काम कर रही हैं। सभी आशाओं को मास्क, ग्लव्स और सैनेटाइजर दिए जाने की जरूरत है।
-कमलजीत कौर, जिलाध्यक्ष, ऑल इंडिया आशा बहू कल्याण समिति
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आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर सभी को जागरूक करने का काम कर रही हैं लेकिन उन्हें मास्क, ग्लव्स या सैनेटाइजर नहीं दिया जा रहा। इसके अलावा अतिरिक्त मानदेय भी नहीं दे रहे। संक्रमण के खतरे के बीच काम कर रहीं कार्यकर्तायों को प्रशासन सुविधाएं दे। खुद को संक्रमण से बचाने के लिए जेब से खर्च कर रहे हैं।
-विनीता द्विवेदी, महिला आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ, अध्यक्ष जैतीपुर
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पिछले साल दिए थे उपकरण
ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समिति को पिछले साल थर्मल स्कैनर और ऑक्सीमीटर उपलब्ध कराए गए थे। जो उपकरण खराब हो गए थे, उन्हें दोबारा दिया गया है। निगरानी समिति बीमार व्यक्ति की सूचना रैपिड रिस्पांस टीम को देती है। आरआरटी जाकर जांच करती है। निगरानी समितियां अच्छा काम कर रहीं हैं।
-पुष्पराज गौतम, डीसीपीएम