शाहजहांपुर। कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप से राजकीय मेडिकल कॉलेज में चिकित्सा व्यवस्थाएं तार-तार हो गई हैं। ट्रामा सेंटर में बेड फुल होने से मरीजों को जमीन पर लिटाकर इलाज किया जा रहा है। यहां सबसे बड़ा संकट ऑक्सीजन का है। कुछ मरीजों को आक्सीजन मिल जाती है तो उसे लगाने के लिए स्टाफ नहीं मिलता है। मरीजों के तीमारदार जैसे-तैसे व्यवस्था करके ऑक्सीजन ले आते हैं तो उसे लगवाने के लिए जूझना पड़ता है। कोरोना संक्रमण फैलने के साथ सांस के मरीजों की संख्या में काफी बढ़ गई है। यहां जिले के अलावा लखीमपुर, हरदोई के मरीज भी लाए जाते हैं।
रविवार रात लखीमपुर के गांव किलियारा निवासी शिवमंगल के बेटे 19 वर्षीय अतुल कुमार को रविवार शाम नाक से खून निकलने पर इलाज के लिए यहां राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया था। ट्रामा सेंटर में बेड न मिलने पर अतुल को जमीन पर लिटा दिया गया। हालात यह हैं कि अतुल को ग्लूकोज चढ़ाने की बोतल को स्टैंड के बजाय लोहे के जाल में लटका दिया गया। शिवमंगल के मुताबिक उनके कहने पर स्टाफ ने साफ कह दिया है कि बेड खाली नहीं है।
निगोही कस्बा निवासी 32 वर्षीय नाजिर अली को रविवार दोपहर सांस लेकर में दिक्कत होने राजकीय मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां वह शाम तक इलाज के लिए इधर-उधर भटकते रहे, लेकिन बेड नहीं मिला। रात करीब नौ बजे जमीन पर लिटाकर इलाज शुरू किया गया। तीमारदारों ने घंटों भटकने के बाद ऑक्सीजन सिलिंडर का इंतजाम तो कर लिया, लेकिन ऑक्सीजन लगाने के लिए स्टाफ नहीं था। तीमारदारों के मुताबिक मरीज की तबियत बिगड़ती जा रही थी, जिससे उन्हें खुद आक्सीजन लगाने पड़ी।
उपलब्ध संसाधनों के मुताबिक मरीजों को बेहतर इलाज मेडिकल कॉलेज में दिया जा रहा है। मरीज बढ़ने के कारण थोड़ी समस्या है, लेकिन इलाज में कोई कमी नहीं हो रही है।
डॉ. अभय सिन्हा, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज