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कोरोना से डूबती अर्थ व्यवस्था को ऊर्जा देगा आर्थिक पैकेज

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शाहजहांपुर। लॉकडाउन के चौथे चरण का संकेत देेते हुए प्रधानमंत्री के मंगलवार शाम प्रसारित राष्ट्र के नाम संदेश मेें कोरोना से डूबती अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा पर समाज के प्रबुद्ध वर्ग सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। विभिन्न वर्गों से जुड़े बुद्धिजीवियों का कहना है कि लॉकडाउन आज के समय की जरूरत है, लेकिन जिस आत्मविश्वास के साथ प्रधानमंत्री ने देश को आगे बढ़ाने की बात की है, उससे देशवासियों का मनोबल बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और कष्टों से जूझते गरीब तबके को भारी राहत मिलेगी।
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घोर संकट के दौर मेें प्रधानमंत्री में जो आत्मविश्वास दिखा, वह आम आदमी तक पहुंचेगा। लॉकडाउन स्वास्थ्य और सुरक्षा की दृष्टि से सभी को स्वीकार करना चाहिए। अर्थ व्यवस्था को आगे बढ़ाने और किसानों से लेकर मजदूरों तक को राहत देने में आर्थिक पैकेज अहम भूमिका निभाएगा। बेरोजगार हुए लोगों को भविष्य से उम्मीद बंधेगी। -डॉ. कनक रानी, शिक्षाविद्
कोरोना का अर्थ व्यवस्था पर जिना प्रभाव आज दिख रहा है, आने वाले समय में और ज्यादा दिखेगा। प्रधानमंत्री की दूरदृष्टि ने इसी तथ्य को ध्यान में रखते हुए कृषि और श्रम क्षेत्र को 20 लाख करोड़ रुपये का आर्थिक पैकेज देकर अर्थ व्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया है। इस पहल से बेरोजगारों में निराशा का माहौल खत्म होगा। -डॉ. रुचि द्विवेदी, अर्थ शास्त्री
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प्रधानमंत्री मोदी जमीन से जुड़े नेता हैं और इसीलिए उन्होंने धरती के लाल कहे जाने वाले किसानों, मजदूरों की पीड़ा को बखूबी देखा समझा है। इसीलिए इन्हीं दोनों वर्गों की सहायता के लिए आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इससे कृषि क्षेत्र का विकास होने के साथ गरीब तबके के उन सभी लोगों की माली हालत सुधरेगी जो अपनी दिहाड़ी खोकर घर लौटे हैं। -श्याम किशोर अग्निहोत्री, प्रगतिशील किसान
प्रधानमंत्री ने चौथे लॉकडाउन का जिक्र करने के साथ रियायतेें बढने का इशारा दिया है और ऐसा होना भी चाहिए क्योंकि अर्थ व्यवस्था आगे बढ़ाने में गैर जरूरी रोक-टोक अब ठीक नहीं। इससे पिछले तीन लॉकडाउन की गलतियों में सुधार का मौका भी मिलेगा। आर्थिक पैकेज का लाभ उद्योगों को मिले, लेकिन सरकार की प्राथमिकता गरीब तबका रहे तो ज्यादा अच्छा होगा। - सैयद रिजवान अहमद, कारोबारी
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