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200 करोड़ का शादी-विवाह से जुड़ा कारोबार निगल गया कोरोना

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शाहजहांपुर। कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले करीब डेढ़ माह से लगे लॉकडाउन से सारे कारोबार चौपट हैं। इससे परेशान व्यापारी शासन-प्रशासन से विभिन्न रियायतें मांग रहे हैं। वही कुछ कारोबार ऐसे हैं, जिनका सीजन साल में कुछ महीने ही रहता है। लॉकडाउन चलने की वजह से अप्रैल मई में होन वाली शादियों की तारीख बढ़ा दी गई, या केवल शादी की रस्म अदायगी की गई। इस कारण सहालग से जुड़े कारोबारी मसलन बारात घर संचालक, बैंड बाजा, कैटरर्स पूरी तरह चौपट हो गए। इनके अलावा शादियों में दिए जाने वाले दहेज से जुड़े कारोबारियों का भी खासा नुकसान हुआ। कारोबारियों की मानें तो इस सहालग में कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपये का कारोबार कोरोना निगल गया।
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इस साल मार्च के अंतिम सप्ताह से 29 जून तक सहालगी सीजन में विवाह की 25 से अधिक शुभ तिथियां मानी गईं। अक्षय तृतीया को महानगर के बारातघरों में करीब एक दर्जन बड़ी शादियों की बुकिंग थी, लेकिन 21 मार्च को जनता कर्फ्यू और उसके बाद किए गए लॉकडाउन ने सभी के अरमानों पर पानी फेर दिया। इनमें सहालग से जुड़े कारोबारी और ऐसे परिवार जो अपने बेटा-बेटियों का विवाह धूमधाम से करने का अरमान संजोए थे। हालांकि, विवाह की अंतिम शुभ तिथि आषाढ़ शुक्ल पक्ष की भार्या नवमी को है। पिछले साल इन्हीं दिनों मेें महानगर और ग्रामीण क्षेत्रों में 500 से ज्यादा शादियां हुई थीं, लेकिन इस बार इन सभी आयोजनों पर कोरोना का ग्रहण लग गया।
जिन लोगों ने विवाह की खरीददारी व अन्य तैयारियां कर लीं थीं, उन पर कोरोना की वजह से दोनों पक्षों के अधिकतम छह लोगों को बुलाने की बाध्यता लागू कर दी गई। लॉकडाउन लगा होने से लोगों ने शादी की तारीख आगे बढ़ाने के साथ मैरिज लॉन, कैटरिंग, बैंड बाजा की बुकिंग कैंसिल कर दी। यही नहीं, विवाह की तैयारियों से जुड़े अन्य अप्रत्यक्ष कारोबार भी प्रभावित हुए, जिनमें वर-वधू को सजाने वाले ब्यूटीशियन, शादी के कार्ड छापने वाले प्रिंटर्स, ज्वैलर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स कारोबारी भी शामिल हैं। इन सभी को अब नवंबर से शुरू होने वाले सहालग का बेसब्री से इंतजार रहेगा।
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प्रिंटिंग प्रेस पर डंप पड़े छपे हुए निमंत्रण पत्र
तमाम वैवाहिक कार्यक्रमों की तिथियां होली के बाद होना तय थीं थीं। इन परिवारों ने निमंत्रण पत्र छपवा लिए थे। कुछ ने रिश्तेदारियों में बांट भी दिए थे। लॉकडाउन लगने पर शादियां कैंसिल हुईं तो इसकी सूचना रिश्तेदारों को वाट्सएप, एसएमएस के जरिये देनी पड़ी। बाद में होने वाली शादियों के लिए तमाम लोगों ने प्रिंटर्स को कुछ रकम एडवांस देकर निमंत्रण पत्र छपने को दिए थे, लेकिन अब छपे हुए कार्डों की कोई उपयोगिता नहीं बची। इसलिए छपे कार्ड प्रिंटर्स के यहां डंप पड़े हैं और लोग उन्हें उठाने तक नहीं आए।
12 अप्रैल से सात मई तक लगभग 30 शादियों की बुकिंग मिली थी। जून में दो और जुलाई में एक शादी की बुकिंग मिलने वाली थी, लेकिन यह सभी आयोजन टल गए। लोग कोरोना के अलावा इससे भी डरे हैं कि शादी में मेहमान ज्यादा इकट्ठा हुए तो कार्रवाई हो जाएगी। इसीलिए लोग मैरिज लॉन बुक नहीं कर रहे। -हरमीत सिंह, बैंक्वेट हॉल स्वामी
13 अप्रैल से 18 मई तक 40 काम मिले थे, लेकिन सब कोरोना ले गया। पिछले साल गर्मियों में 50 बुकिंग मिली थीं, लेकिन अब सहालग से कोई उम्मीद नहीं बची। जिले में करीब 30 बैंड ग्रुप हैं। हमारे बैंड के 31 लोगों की टीम में दस लाइट वाले भी हैं। इन सबको रोजी-रोटी मुश्किल हो गई है। - सगीर अहमद, बैंड मास्टर
तमाम लोगों ने शादी के कार्ड छपवाए थे। कई महंगी शादियों के कार्ड भी महंगे छपवाए गए, लेकिन लॉकडाउन के बाद की तारीखों वाले जो कार्ड छापे गए हैं, उनकी गड्डियां प्रेस में पड़ी हैं। कार्ड छपवाने वालों से संपर्क करने पर उनका कहना है कि जब शादी ही नहीं हो रही तो छपे हुए कार्डों की कोई अहमियत नहीं बची। - आशीष गुप्ता, प्रिंटर
पिछले साल सहालग में शोरूम से हर माह औसतन 200 गाडिय़ां निकलती थीं। कोरोना से लोगों की प्राथमिकता बदल गई है। अब गाड़ी लग्जरी आइटम हो गई है। अगला सीजन भी ऐसे ही बीतेगा क्योंकि कंपनियों में उत्पादन बंद है। हां, कोरोना से सुरक्षा को लोग गाड़ी ले सकते हैं। शोरूम खुलने के बाद से 50 गाडिय़ां भी बुक नहीं हुईं। - जगजीत सिंह माटा, ऑटोमोबाइल डीलर
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