शाहजहांपुर। कोरोना महामारी से नवजात और बच्चों के साथ ही गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण का काम प्रभावित हो रहा है। लॉकडाउन में तो टीकाकरण का काम हुआ ही नहीं, अब भी स्वास्थ्य कर्मियों के कोरोना ड्यूटी में व्यस्त होने के कारण यह काम ज्यादा नहीं हो पा रहा है। कंटेन्मेंट जोन में तो बिल्कुल ठप पड़ा है। स्वास्थ्य विभाग अभी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ओर से शिशुओं और गर्भधात्री महिलाओं के लिए टीकाकरण अभियान चलाया जाता है। टीकाकरण अभियान की सफलता के लिए एएनएम, आंगनबाड़ी और आशा वर्कर आदि भी शहरी तथा ग्रामीण अंचलों में जाकर यह काम करती हैं। अभियान में नवजात से लेकर 16 वर्ष तक की आयु तक के बच्चों को टीके लगाए जाते हैं। अभियान के जरिये बच्चों को तमाम प्रकार की गंभीर बीमारियों से बचाया जाता है।
पहले लॉकडाउन और अब उसके बाद कंटेन्मेंट जोन के रूप में पैदा होने वाली स्थिति से स्वास्थ्य विभाग का महत्वपूर्ण अभियान प्रभावित हो रहा है। लॉकडाउन अवधि में तो अभियान बिल्कुल ठप ही रहा, जबकि अब जिन क्षेत्रों में कंटेन्मेंट लागू है, वहां कम से कम 21 दिन के लिए तो ब्रेक ही लग जा रहा है। इसका कारण यह है कि कंटेन्मेंट जोन में लोगों का आवागमन बिल्कुल बंद ही है, इस कारण न तो टीकाकरण के लिए बच्चों को अस्पताल तक लाया जा सकता है और न ही स्वास्थ्य विभाग की टीम इन एरिया में जा सकती हैं।
बच्चों को ये टीके लगाए जाते हैं
टीकाकरण अभियान में नवजात से लेकर लगभग 16 वर्ष की आयु तक जो टीके लगाए जाते हैं, उनमें टीबी की रोकथाम के लिए बीसीजी, हेपेटाइटिस बी की रोकथाम को हेप-बी, पोलियो खुराक, खांसी टिटनेस आदि के लिए पेंटा, दस्त रोकने को रोटा, निमोनिया के लिए पीसीवी, दिमागी बुखार के लिए जेई, डिप्थीरिया आदि के लिए डीपीटी के टीके शामिल हैं।
पोलिया प्रतिरक्षण अभियान तो निश्चित समय में ही चलाया जाता है। यह अभियान सितंबर में प्रस्तावित है, लेकिन अन्य टीकाकरण अभियान प्रत्येक बुधवार और शनिवार को चलाया जा रहा है। चूंकि यह राष्ट्रीय कार्यक्रम है, इसलिए रोका नहीं जा सकता। कंटेन्मेंट एरिया में मजबूरी के कारण अभियान प्रभावित रहता है, शेष जगहों पर बराबर चल रह है। कंटेन्मेंट जोन में 21 दिनों की अवधि तक इंतजार किया जाता है। -डॉ. लक्ष्मण सिंह, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी