फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Shahjahanpur News: नाबालिग से दुष्कर्म के दोषी को 20 वर्ष का कठोर कारावास

विज्ञापन
विज्ञापन
शाहजहांपुर। किशोरी को घर से ले जाकर दुष्कर्म करने के दोषी को अदालत ने 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया है। दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।
विज्ञापन

जलालाबाद थाना क्षेत्र के एक गांव के रहने वाले व्यक्ति ने 30 मार्च 2017 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी कि वह मजदूरी के लिए दूसरे प्रदेश गया हुआ था। पांडेय उर्फ प्रदीप उनकी 16 वर्षीय नाबालिग बेटी को घर से अपने साथ ले गया। उनकी पत्नी ने उसे रोकने का प्रयास किया लेकिन वह नहीं रुका।
पांडेय ने उनकी बेटी को अपने घर ले जाकर उससे दुष्कर्म किया। पत्नी से जानकारी मिलने पर वह घर आए और पुलिस में शिकायत की। पुलिस ने विवेचना शुरू की। पांडेय के खिलाफ दुष्कर्म, पॉक्सो एक्ट की धाराओं में आरोपपत्र अदालत भेजा गया। गवाहों और साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने पांडेय उर्फ प्रदीप को दोषी पाया।
विज्ञापन

अदालत ने कहा कि अवयस्क बालिकाओं के विरुद्ध यौन अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अभियुक्त के विरुद्ध यदि दंडादेश पारित नहीं किया जाता तो समाज में गलत संदेश जाएगा और न्यायिक प्रक्रिया से लोगों का विश्वास उठ जाएगा। विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) प्रेम शंकर ने उसे 20 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अधिरोपित अर्थदंड की समस्त धनराशि पीड़िता को चिकित्सीय खर्च एवं पुनर्वास के लिए नियमानुसार प्रदान की जाएगी।



हादसे में मजदूर की मौत पर इंश्योरेंस कंपनी को क्लेम देने का आदेश

शाहजहांपुर। हादसे में मजदूर की मौत के बाद क्लेम अस्वीकृत करने के मामले में स्थायी लोक अदालत ने इंश्योरेंस कंपनी को ब्याज के साथ क्लेम देने का आदेश दिया है। क्लेम के लिए मृतक का परिवार पिछले सात साल से परेशान था।
14 अक्तूबर 2018 को सिंधौली के गांव निधौना मकरंदपुर निवासी विजय प्रताप सिंह रोजा स्थित दून इंटरनेशनल स्कूल के निर्माण स्थल पर अन्य व्यक्तियों के साथ मजदूरी कर रहे थे। तभी लिंटर गिर गया, जिससे विजय प्रताप व कुछ अन्य मजदूरों की मौके पर ही मृत्यु हो गई। परिवार ने मुख्यमंत्री किसान एवं सर्वहित बीमा योजना के अंतर्गत पांच लाख रुपये का क्लेम ओरियंटल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड, सदर बाजार के समक्ष प्रस्तुत किया।
ओरिएंटल इंश्योरेंस कंपनी ने 16 मई 2019 को वादीगण का क्षतिपूर्ति क्लेम इस आधार पर खारिज कर दिया कि मृतक परिवार का मुखिया या रोटी अर्जक नहीं था और कोई आयु प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं किया गया।
स्थायी लोक अदालत के अध्यक्ष अबुल कैश, सदस्य मो. सलीम अंसारी व दीपक कुमार वर्मा ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक फैसले का हवाला दिया, जिसमें यह स्थापित किया गया था कि एकमात्र कमाने वाले की अवधारणा कृत्रिम है और परिवार की आय में आंशिक योगदानकर्ता भी इस योजना के तहत पात्र है।
अदालत ने पाया कि घटना के समय मृतक की आयु 18 से 70 वर्ष के बीच थी और वह एक मजदूर के रूप में अपने परिवार की आय में योगदान देता था। वर्ष 2018 में परिवार की वार्षिक आय 48,000 रुपये थी। अदालत ने फैसला सुनाया कि बीमा कंपनी द्वारा बीमा क्लेम को अस्वीकार करना गैरकानूनी था।
स्थायी लोक अदालत ने बीमा कंपनी को आदेश दिया कि वह वादीगण को बीमा राशि पांच लाख रुपये तथा क्लेम को अस्वीकार किए जाने की तारीख से भुगतान की तिथि तक सात प्रतिशत वार्षिक ब्याज का भुगतान निर्णय की तारीख से एक माह के अंदर करे। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें