वाणिज्य कर विभाग की टीम ने डिप्टी कमिश्नर एसके मिश्र के नेतृत्व में बृहस्पतिवार को खुटार में एक बंद राइस मिल में छापा मारा। मिल में गेहूं की खरीद की जा रही थी। टीम के पहुंचने पर श्रमिक और व्यापारी दीवार फांदकर भाग निकले।
डिप्टी कमिश्नर एसके मिश्र, वाणिज्य कर अधिकारी पितिन बाजपेयी, राजेंद्र द्विवेदी आदि खुटार में पुवायां रोड पर वर्षों से बंद श्याम बाबा राइस मिल पहुंचे। मिल का गेट अंदर से बंद था। टीम ने दरार से देखा तो मिल परिसर में एक ट्रक में गेहूं लोड किया जा रहा था। आवाज देने पर तौल कर रहे श्रमिक, व्यापारी और मुनीम आदि दीवार फांदकर भाग निकले। टीम के सदस्य भी दीवार फांदकर अंदर पहुंचे और जांच शुरू की। मौके पर कोई अभिलेख नहीं पाया गया। गेहूं किसका था और कहां जाना था, इसका भी पता नहीं लग सका।
जानकारी पाकर तमाम व्यापारी मौके पर पहुंचे, लेकिन टीम के सदस्यों के सामने उनकी एक न चल सकी। डिप्टी कमिश्नर ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। अभी तक टीम से किसी भी व्यापारी ने गेहूं को अपना बताते हुए कागजात प्रस्तुत नहीं किए हैं। बरामद माल को सुपुर्दगी में दिया जा रहा है। टीम के जानकारी मिलने पर नगर की तमाम आढ़तों पर खरीद बंद हो गई और किसानों की ट्रालियां मौके से हटवा दी गईं।
व्यापारी पहुंचे तो नरम पड़ गए अधिकारियों के सुर
खुटार। मिल के अंदर हो रही गेहूं की तौल के मामले में छापा डालने के समय अधिकारियों के सुर तीखे थे। अधिकारियों का कहना था कि गेहूं अवैध रूप से स्टाक किया गया है और तौल भी अवैध तरकी से हो रही है। लिहाजा कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाद में एक व्यापारी की टीम के सदस्यों से एकांत में बात हुई। इसके बाद टीम के सुर नरम पड़ गए। कहा, जाने लगा कि हो सकता है गेहूं किसी व्यापारी का हो और कागजात मौके पर न हों, इस कारण लोग भाग गए हों।
सेंटर का तो नहीं दिखाया जा रहा गेहूं
खुटार। धान, गेहूं की सरकारी खरीद में धांधली कोई नई बात नहीं है। आढ़तों और मिलों में खरीदे गए धान, गेहूं को सरकारी क्रय केंद्र पर खरीदा दिखाने का चलन बहुत पुराना है। आढ़त पर अनाज कम रेट में खरीद कर रुपये सेंटर से किसान के बैंक खाते में भिजवा दिए जाते हैं। किसान से उसकी किसान वही, खतौनी आदि लेकर खरीद को सेंटर पर दिखा दिया जाता है। बंद मिल में चल रही गेहूं खरीद भी ऐसे ही मामले का हिस्सा हो सकती है। यदि गेहूं व्यापारी का है और सही खरीद हो रही थी तो मिल का गेट बंद कर तौल क्यों कराई जा रही थी।