गांव धारा में निकाली गई कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
पुवायां। गांव धारा में कलशयात्रा के साथ श्रीमद्भागवत कथा का शुभारंभ हो गया। बृहस्पतिवार को श्रद्धालु कथास्थल गांधी पार्क में एकत्र हुए। आचार्य कौशल महाराज ने मंत्रोच्चार के साथ श्रीमद्भागवत कथा की पुस्तक और कलशों की पूजा कराई। इसके बाद श्रद्धालु बैंडबाजों के साथ रंग-गुलाल उड़ाते और देवताओं की जय जयकार करते हुए गोमती नदी के गुटैया घाट पहुंचे। आचार्य महेंद्र प्रजापति और सुनील ने बालाजी महाराज के ध्वज और गोमती की पूजा संपन्न कराई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने गोमती के जल से कलश भरे। इसके बाद कलशयात्रा वापस गांव में माता भगवती के स्थान पर पहुंची और पवित्र जल अर्पण किया। कथास्थल पर 51 कन्याओं और महिलाओं ने जल कलश स्थापित किए। कथा आठ सितंबर तक चलेगी। संवाद
परीक्षित के जन्म और जीवन के आदर्शों का प्रसंग सुनाया
खुदागंज। ग्राम म्यूना में चल रही श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन नैमिषारण्य धाम से आए कथाव्यास पं. शैलेंद्र मिश्रा ने महाराजा परीक्षित के जन्म और जीवन के आदर्शों का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परीक्षित का जन्म समाजसेवा और परोपकार के लिए हुआ था। उन्होंने बताया कि नियति और भूलवश संत का अपमान होने के कारण परीक्षित को तक्षक नाग के डसने का श्राप मिला। कथा के दौरान उनके जीवन से सेवा, धर्म और परोपकार की प्रेरणा लेने का संदेश दिया गया। इस दौरान पवन सिंह, प्यारेलाल, सोनू सिंह, रामदयाल, अनिल सिंह, सचिन, शिवम सिंह आदि श्रद्धालु मौजूद रहे। संवाद
श्रीकृष्ण की महारास लीला का प्रसंग सुनाया
कुर्रियाकलां। कांट के मरहैया मोहल्ला स्थित सिद्धेश्वर नाथ मंदिर में चल रही श्रीमद्भागवत कथा में बृहस्पतिवार को कथाव्यास राहुल कृष्ण दीक्षित ने श्रीकृष्ण की महारास लीला का वर्णन किया। उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात भगवान श्रीकृष्ण ने यमुना तट पर यह अलौकिक लीला रची थी। बांसुरी की धुन सुनकर गोपियां अपने सांसारिक कार्य और बंधन छोड़कर कृष्ण के पास पहुंचीं। उनकी निष्काम भक्ति देखकर श्रीकृष्ण ने रास स्वीकार किया। कथाव्यास ने कहा कि महारास सांसारिक प्रेम नहीं, बल्कि जीवात्मा के परमात्मा के प्रति समर्पण और निष्काम भक्ति का प्रतीक है। संवाद
गांव धारा में निकाली गई कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक
गांव धारा में निकाली गई कलश यात्रा में शामिल श्रद्धालु। स्रोत : आयोजक