2013 में शाहजहांपुर आए पंकज उधास के साथ नरेंद्र सक्सेना का फाइल फोटो। स्रोत : नरेंद्र सक्सेना
शाहजहांपुर। ओसीएफ के रामलीला मैदान पर सजाए गए भव्य मंच पर मशहूर गजल गायक पंकज उधास ने हारमोनियम संभालते हुए सुर छेड़ा ही था कि कार्यक्रम में अफरातफरी के हालात पैदा हो गए। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत आइए बारिशों का मौसम है...से किया तो मूसलधार बारिश शुरू हो गई। लोग भीगने से बचने को सुरक्षित जगह तलाशने लगे थे। बाद में उनका कार्यक्रम गांधी भवन में हुआ था।
चार फरवरी 2013 को तत्कालीन डीएम रितु माहेश्वरी ने शाहजहांपुर महोत्सव का आयोजन किया था। उद्घाटन के दूसरे दिन ही शाम-ए-गजल का आयोजन हुआ था। इसमें गजल गायक पंकज उधास को आमंत्रित किया गया था। वहीं मौसम विभाग ने बारिश का अलर्ट जारी कर दिया था। ओसीएफ मैदान में बारिश की वजह से कार्यक्रम नहीं हो पाया था। इसके बाद गांधी भवन में आयोजन हुआ था। जहां उन्होंने खूब तालियां बटोरी थीं। न कजरे की धार, न मोतियों के हार गीत से वाहवाही लूटी थी। सबसे अंत में अपनी फेमस गजल चिट्ठी आई है-आई है...सुनाया था। देर रात तक चले कार्यक्रम में खूब भीड़ रही थी। क्रिएटिव आर्ट के अध्यक्ष नरेंद्र सक्सेना बताते है कि इतने बड़े गायक होने के बाद भी पंकज उधास में जरा-भी घमंड नहीं था। वह सादगी पसंद व्यक्ति थे। उनके आगमन पर लोग उनसे आसानी से मिले और फोटो खिंचवाए थे।