सपा कार्यकर्ताओं ने किया विरोध प्रदर्शन
हिंदू संगठन ने फूंका था पुतला
पूर्व एमएलसी जयेश प्रसाद ने कहा कि शहीद दिवस पर शहीदों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर कचरे में फेंकना निंदनीय कार्य है। जब बात शहीदों के सम्मान की आएगी तो खामोश रहना जुल्म के बराबर है। जिन्होंने जान देकर आजादी दिलाई। नगर निगम उनका सम्मान नहीं कर पा रहा है। दस दिन में शहीदों की प्रतिमाओं को उचित सम्मान नहीं मिला तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
शहीद अशफाक उल्ला खां के प्रपौत्र शादाब उल्ला खां ने कहा कि यह काफी विचलित करने वाली घटना है। यह घटना सिर्फ जिले के लिए नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक को दुख देने वाली है। शहीदों की प्रतिमाओं को क्षतिग्रस्त कर कूड़े में डाल दिया गया। जितने भी अधिकारी कृत्य में शामिल हैं। उन्हें सजा दी जाए और प्रतिमाओं को सम्मान दिया जाए।
70 के दशक में लगाई गईं थीं प्रतिमाएं
इतिहासकार डॉ. विकास खुराना ने कहा कि 70 के दशक के शुरुआती वर्षों में ही शहर नगर पालिका में काकोरी केस के अमर नायकों की प्रतिमाएं लगाई गईं थीं। यहां एक फव्वारा पहले से ही लगा हुआ था। इसी फव्वारे के आगे प्रतिमाएं लगाई गईं। वर्ष 2003 में तत्कालीन मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के प्रयासों से विख्यात क्रांतिकारी रहे प्रेम कृष्ण खन्ना की भी प्रतिमा यहां लगाई गई।
मुख्य अभियंता ने दर्ज कराई प्राथमिकी
नगर निगम के मुख्य अभियंता आशीष त्रिवेदी ने सदर बाजार थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। इसमें कहा है कि मै. फ्लाई इंफ्राटेक पता लखनऊ, थाना काकोरी, सेक्टर-डी बसंतकुंज योजना, दुबग्गा को शहीद प्रतिमास्थल का सुंदरीकरण करना था। 22 मार्च को बगैर विभाग को अवगत कराए फर्म ने शहीद प्रतिमाओं को हटाया। फर्म ने गरिमा के अनुरूप कार्य नहीं किया। पुलिस ने फर्म के खिलाफ बीएनएस की धारा 196 (2) और 352 के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। एसपी राजेश द्विवेदी ने बताया कि मामले की जांच की जाएगी।
भविष्य में भी बरती जाएगी पूरी एहतियात- डीएम
डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि फर्म के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है। साथ ही लापरवाही बरतने पर नगर निगम के जेई, एई और एक्सईएन को निलंबित करना तय हो गया है। नगर निगम में संचालित विभिन्न निर्माण एवं सुंदरीकरण कार्यों के दौरान सुनिश्चित किया जाए कि इन कार्यों में यदि किसी शहीद अथवा महत्वपूर्ण व्यक्ति आदि की प्रतिमा, चित्र अथवा फ्लैक्स आदि स्थापित हैं तो उन्हें हटाने से पूर्व महापौर एवं जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया जाए। उनकी उपस्थिति में तथा उनके दिए गए सुझावों के अनुसार ही कार्य किया जाए।