शाहजहांपुर। तेजी से बढ़ रही मच्छरों की संख्या को नियंत्रित करने में नगर निगम नाकाम साबित हो रहा है। वहीं, बाजार में मिल रहे क्वायल, लिक्विड और अगरबत्ती भी बेअसर साबित हो रहे हैं, ऐसे में लोग परेशान हैं। डॉक्टरों के मुताबिक 22 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान मच्छरों के प्रजनन के लिए मुफीद होता है। पिछले एक पखवाड़े से तापमान बढ़ने के साथ ही मच्छरों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है। ऐसे में लोगों की मुश्किलें भी बढ़ गईं हैं और वे सारी रात करवटें बदलने को मजबूर हैं।
सामान्यता ऐसा तापमान फरवरी के अंतिम सप्ताह से लेकर मई तक होता है, लेकिन पिछले एक पखवाड़े से तापमान तेजी से बढ़ा है, इसके साथ ही मच्छरों की संख्या बढ़ने की रफ्तार भी तेज हो गई है। इसके साथ ही शाहजहांपुर में कई स्थानों पर जलभराव भी मच्छरों के प्रजनन के लिए मुफीद साबित हो रहा।
यहां बता दें फॉगिंग से कुछ हद तक मच्छरों पर नियंत्रण होता है पर पूरी तरह से लार्वा खत्म नहीं हो पाते। यही वजह है नगर निगम की व्यवस्थाएं भी कारगर साबित नहीं हो रहीं हैं।
60 वार्डों के लिए निगम के पास हैं सिर्फ आठ मशीनें
नगर निगम में 60 वार्ड हैं, जिनमें फॉगिंग के लिए छोटी-बड़ी मिलाकर कुल आठ मशीनें हैं। इन आठ मशीनों से पूरे नगर निगम क्षेत्र के वार्डों में फॉगिंग संभव नहीं है। एक वार्ड में कम से कम सात से आठ गलियां हैं, ऐसे में फॉगिंग के लिए मशीनें ही पूरी नहीं पड़ रही हैं। यही वजह है कि कई-कई दिनों तक फॉगिंग न होने से मच्छरों की संख्या बढ़ जाती है।
एक मच्छर पैदा करता है करीब 20 हजार मच्छर
एसएस कॉलेेज में जूलोजी के एचओडी डॉ. रमेश चंद्रा का कहना है कि 22 से 35 डिग्री सेल्सियस तापमान मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माना जाता है। इससे कम या ज्यादा तापमान में इनकी मौत हो जाती है। एक मच्छर अपने जीवन काल में करीब 20 हजार मच्छर पैदा करते हैं। जिनमें से करीब 20 प्रतिशत कई कारणों में मर जाते हैं। यानी एक मच्छर से पैदा होने वाले करीब 16 हजार मच्छर बच जाते हैं। नर मच्छर की उम्र 14-15 दिन की होती है, जबकि मादा मच्छर 20-21 दिन जीता है।
घर के पास की नालियों में डालें केरोसिन
मच्छरों पर नियंत्रण के लिए जरूरी है कि घर के आसपास की नालियों में पांच-छह दिन के अंतराल पर केरोसिन डाला जाए । इससे पानी पर तेल की एक पतली परत बन जाएगी और मच्छरों के लार्वा सांस न ले पाने से मर जाएंगे।
हर साल दस करोड़ रुपये की क्वॉयल, लिक्विड-अगरबत्ती खरीदते हैं शहरवासी
शहर के लोग मच्छरों से बचाव के लिए हर साल क्वॉयल, लिक्विड और अगरबत्ती खरीदने में करीब दस करोड़ रुपये खर्च करते हैं। मच्छर नियंत्रण के उत्पाद बेचने वाले अमृत लाल का कहना है कि सिर्फ उनके ब्रांड की बिक्री सालाना करीब एक से डेढ़ करोड़ रुपये है। इसके अलावा कई अन्य कंपनियों के उत्पाद भी बाजार में हैं। जिनकी बिक्री भी करोड़ों में है। फरवरी के अंतिम सप्ताह से इनकी बिक्री में तेजी आ जाती है, जो मई तक रहती है। दिवाली के दौरान बिक्री फिर बढ़ जाती है। मच्छर मारने वाली अगरबत्ती के थोक व्यापारी पंकज का कहना है कि साल में करीब पांच लाख रुपये की बिक्री अकेले वही करते हैं। उनके अलावा बाजार में कई और थोक व्यापारी भी हैं ।
मच्छरों ने बदली प्रवृत्ति
मच्छरों की बदली प्रवृत्ति भी परेशानी बढ़ा रही है। सामान्य तौर पर माना जाता है कि मच्छर 40 फुट की ऊंचाई तक ही उड़ते हैं, लेकिन अब वे उससे भी ऊपर की मंजिल वाले मकानों तक पहुंचने लगे हैं। जिनकी वजह से लोगों का जीना मुहाल हो गया है।
नगर निगम की आठ मशीनों से विभिन्न वार्डों में छिड़काव कराया जा रहा है। जहां से सूचना आती है, वहां पर फॉगिंग के लिए कर्मचारियों को भेजा जाता है। इसके अलावा संचारी रोग अभियान के तहत एंटी लार्वा का भी छिड़काव किया जा रहा है। - डॉ. ओपी गौतम, नगर स्वास्थ्य अधिकारी