शाहजहांपुर। प्रशासन ने थोक और फुटकर कारोबारियों को दालों का भंडारण शासन से निर्धारित स्टॉक सीमा के अनुसार करने के निर्देश दिए हैं। इस बीच, एडीएम फाइनेंस गिरिजेश कुमार चौधरी को उन सभी कारोबारियों को अपना स्टॉक सुधारने के लिए एक माह की मोहलत दी है।
पिछले साल कोरोना संकट की शुरुआत में लॉकडाउन लगने के साथ ही दालों के भाव तेजी से बढ़ने लगे थे। दालों पर महंगाई गत वर्ष अगस्त, सितंबर तक हावी रही। बाद में दाम घटने शुरू हुए, लेकिन गत मार्च में होली के बाद से फिर दालें महंगी होने लगीं। इसे देखते शासन ने दालों की जमाखोरी रोकने के लिए थोक विके्रताओं के लिए अधिकतम स्टॉक सीमा 200 टन और फुटकर विक्रेताओं के लिए पांच टन निर्धारित कर दी। साथ ही दाल प्रतिष्ठानों का आकस्मिक निरीक्षण कर वहां भंडारित दालों की मात्रा का आकलन कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।
इसके अनुपालन में बीते दिन एडीएम फाइनेंस के नेतृत्व में प्रभारी जिला खाद्य विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय और रोजा मंडी के सचिव प्रवीण अवस्थी आदि अधिकारियों ने बहादुरगंज और केरूगंज के दाल प्रतिष्ठानों की जांच की तो कई कारोबारियों के गोदाम मेें दालें नियत स्टॉक सीमा से ज्यादा पाईं। एडीएम ने बताया कि सभी प्रतिष्ठानों पर दालों के थोक और फुटकर रेट मेें इतना अंतर नहीं पाया गया कि मुनाफाखोरी साबित हो सके। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश आदि से मंगाई जा रही दालों का भाड़ा अधिक होने से फुटकर दाम उसी के अनुसार तय हो रहे है। एडीएम के अनुसार जिन प्रतिष्ठानों पर स्टॉक सीमा से ज्यादा दालें पाई हैं, उनसे संबंधित कारोबारियों को अपने स्टॉक में सुधार के लिए 30 दिन का समय दिया गया है। दोबारा निरीक्षण में दालेें ज्यादा भंडारित पाए जाने पर संबंधितों के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।