शाहजहांपुर। गर्मी बढ़ने के साथ बिजली की खपत बढ़ी तो ट्रांसफार्मरों के खराब होने का सिलसिला बढ़ता चला गया। केवल एक महीने जून में अलग-अलग क्षमता के 400 ट्रांसफार्मर खराब हुए, जिसका खामियाजा उपभोक्ताओं को उठाना पड़ा। जहां-जहां ट्रांसफार्मर खराब हुए वहां घंटों बिजली सप्लाई ठप रही। ट्रांसफार्मर खराब होने पर कई जगह बवाल हो चुका है।
जनपद के विभिन्न बिजली उपकेंद्रों से ट्रांसफार्मर वर्कशॉप (कार्यशाला) को सामान्य दिनों में प्रतिमाह 125 से 150 ट्रांसफार्मर सुधारने के लिए मिलते हैं, लेकिन जून में भीषण गर्मी के कारण बिजली खपत बढ़ गई, जिससे 400 ट्रांसफार्मर खराब हुए। इस वजह से कार्यशाला में एक ट्रांसफार्मर ठीक होने में पांच से सात दिन लग रहे हैं, जबकि नियमानुसार यह काम 72 घंटे में हो जाना चाहिए।
जिले में 33 केवी क्षमता के 38 सब स्टेशनों से विभिन्न श्रेणियों के 4500 ट्रांसफार्मर जुड़े हैं। इनमें पांच सौ से ज्यादा ट्रांसफार्मर केवल शहरी क्षेत्र में लगे हैं। 132 केवी और 220 केवी क्षमता वाले पावर स्टेशनों पर लगे पांच एमवीए और अधिक क्षमता वाले बड़े ट्रांसफार्मरों में कोई फाल्ट होने पर वहां उन्हें तत्काल सुधारने का काम शुरू कर दिया जाता है, लेकिन वितरण प्रणाली से जुड़े 100, 250 और 400 केवी क्षमता वाले ट्रांसफार्मरों के जलने पर उन्हें बदलने में तीन से चार दिन लगते हैं। इतनी देर तक क्षेत्र विशेष में बिजली आपूर्ति बाधित न रहे, इसकेे लिए ट्रॉली ट्रांसफार्मर लगाए जाते हैं, लेकिन जिले में ट्राली ट्रांसफार्मरों की संख्या 30 है। शहरी क्षेत्र में 33 केवी के नौ सब स्टेशनों के बीच सिर्फ सात ट्रॉली ट्रांसफार्मर हैं।
इसलिए कार्यशाला के कर्मचारियों पर भी ट्रांसफार्मर जल्द ठीक करने का दबाव बना रहता है। सोमवार को पुवायां मार्ग पर चिनौर के पास स्थित वर्कशॉप में खराब ट्रांसफार्मरों का अंबार लगा था। कर्मचारियों ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी गर्मी के सीजन में ट्रांसफार्मर ज्यादा खराब हो रहे हैं। इसीलिए उन्हें शाम पांच बजे ड्यूटी पूरी होने के बाद भी रात नौ बजे तक मरम्मत, वेल्डिंग, बाइंडिंग आदि काम करना पड़ता है। ट्रांसफार्मर में नई बाइंडिंग होने पर उसके ऊपर कुचालक के तौर पर डाले गए पेंट को हीटिंग चैंबर (ओवन) में सुखाने में 24 से 48 घंटे लग जाते हैं। यही वजह है कि ट्रांसफार्मर ठीक कर उन्हें संबंधित उपकेंद्रों को लौटाने में भी समय लग रहा है।
पीलीभीत के न्यूरिया में खुली नई कार्यशाला
विद्युत वितरण में जनपद के साथ पड़ोसी जिला पीलीभीत शामिल होने के कारण अभी तक वहां खराब होने वाले ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए यहां भेजे जाते थे। हाल ही मेें पीलीभीत के न्यूरिया कस्बे में विद्युत विभाग की अत्यधिक संसाधनों वाली ट्रांसफार्मर कार्यशाला खुल गई है। इससे पीलीभीत के ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कार्य का बोझ खत्म हो गया है।
इन दिनों ओवरलोडिंग के कारण वोल्टेज कम मिल रहे हैं। ट्रांसफार्मर ज्यादा खराब होने की वजह भी यही है। कर्मचारी सीमित हैं, लेकिन उनसे देर रात तक काम लिया जा रहा है। ताकि ट्रांसफार्मर नियत समय में ठीक कर लौटाए जा सकें। ट्रांसफार्मरों के उतार और लदान में कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि यह काम कर्मचारियों की कमी के कारण ठेका पर निजी श्रमिकों से कराया जा रहा है। - मुकुल रस्तोगी, प्रभारी अवर अभियंता, ट्रांसफार्मर कार्यशाला