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रामगंगा में उफान बढ़ा, नारायणनगर और मोहनपुर में कटान तेज

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शाहजहांपुर। उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी के विभिन्न बांधों-बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण मिर्जापुर व कलान क्षेत्र में गंगा और रामगंगा बुधवार को भी उफानाई रहीं। पिछले दो दिनों की तुलना में बुधवार को रामगंगा का जलस्तर 1.50 मीटर और बढ़ गया। इससे रामगंगा की धारा परौर क्षेत्र में नारायण नगर पश्चिमी और मोहनपुर गांव के पास पहुंच गई है। रामगंगा का विकराल रूप देख वहां के लोग सुरक्षित स्थानों पर जाने को हैं।
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गंगा में नरौरा बैराज से पानी की निकासी मंगलवार की तुलना में 10438 क्यूसेक कम हो गई है। अब वहां से 214807 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा। सिंचाई विभाग के बाढ़ नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के अनुसार खो, हरेली, किच्छा, रामनगर और कालागढ़ डाम से रामगंगा में 12436 क्यूसेक पानी रामगंगा में जा रहा है। पानी की यह मात्रा पिछले 24 घंटे में 12099 क्यूसेक कम हुई है, लेकिन रामगंगा का जल स्तर बरेली के चौबारी घाट से लेकर परौर क्षेत्र तक 30 सेमी बढ़कर 159.76 मीटर हो गया है। विभागीय अभियंताओं का कहना है कि बांधों-बैराजों से छोड़े जाने वाले पानी में थोड़ी कमी आई है, लेकिन दो दिन पहले छूटा पानी अब यहां पहुंचने से जिले में दोनों नदियां और उफना गई हैं।
मिर्जापुर क्षेत्र में गंगा की बाढ़ से आजाद नगर गांव चौतरफा घिर गया है। एसडीएम कलान रमेश बाबू ने बाढ़ प्रभावित गांवों का निरीक्षण कर बाढ़ चौकियों को अलर्ट कर दिया है। आजाद नगर के कच्चे रास्ते पर घुटनों तक पानी भर जाने के बाद भी लोग आ जा रहे हैं। इस्लाम नगर की रोड से गांव के दक्षिण दिशा की आबादी में पानी पहुंच रहा है। चौंरा-बसोला मार्ग के दक्षिण की फसलें बाढ़ के पानी में डूब गई हैं। हालांकि, इन गांवों के अंदर अभी बाढ़ का पानी नहीं भरा है। एसडीएम ने बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों को बचाव के सभी उपकरण और दवाएं आदि उपलब्ध रखने के निर्देश दिए हैं। हालांकि, प्रशासन ने बाढ़ क्षेत्र से करीब सात किमी दूर ढाई गांव के स्कूल में चौकी बनाई है, लेकिन उससे बाढ़ पीड़ितों को कोई खास सहूलियत मिलने वाली नहीं है। हर साल बाढ़ का सामना करने वाले आजाद नगर और इस्लाम नगर के ग्रामीणों का कहना है कि जब तक संभव होगा, वह अपने घर नहीं छोड़ेंगे।
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फसलें डूबने से नष्ट होने की आशंका
परौर। रामगंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी का रौद्र रूप देख मजरा मोहनपुर, नारायण नगर पश्चिमी, बाजार बिचपुरी आदि गांवों के लोग भयभीत हैं। उन्हें आशंका है कि इसी तरह से रामगंगा बढ़ती रही तो उनके खेतों में खड़ीं घुइया, तोरई, मेंथा आदि की फसलें नष्ट हो जाएंगी। रामगंगा बढ़ जाने से जानवरों के लिए चारा की दिक्कत हो रही है। नाव की हालत जीर्ण-शीर्ण होने के बावजूद ग्रामीण उसी से नदी पार कर खेतों की ओर जा रहे हैं। इस कारण कभी भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। इन गांवों के लोग फसलों के अलावा अपने घर भी रामगंगा की बाढ़ में नष्ट होने को लेकर काफी चिंतित है। संवाद
खेती की जमीन नदी में कट जाने पर एक एकड़ कृषि भूमि का सरकार से पट्टा मिला। अब उसे भी रामगंगा काट रही है। बची जमीन पर दबंग कब्जा किए हुए हैं। इसलिए आज तक उस पट्टे का कोई लाभ नहीं मिला। - हरीराम कश्यप, परौर
मेरा रामगंगा के किनारे देवी मंदिर के नजदीक 12 बीघा खेत था जो कट चुका है। दूसरा खेत राम गंगा के पार है, उस पर भू-माफिया कब्जा किए हुए हैं। रोजी रोटी के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है। - सत्यपाल सिंह, मोहनपुर
नारायण नगर में रामगंगा मेरे खेत से मात्र 100 मीटर की दूरी पर कटान कर रही है। अगर कटान नहीं रोका गया तो हमारी 30 बीघा जमीन नदी में समा जाएगी। ऐसे में मेरा परिवार रोजी रोटी के संकट से घिर जाएगा। - धनपाल सिंह कश्यप, नारायणनगर
मेरा चार बीघा खेत था जो कि पिछले सालों में रामगंगा ने काट दिया। खेत कट जाने से रोजी-रोटी की समस्या पैदा हो गई है। खेती को हुए नुकसान के बदले सरकार से अभी तक कोई सहायता नहीं मिली। - जयवीर सिंह, परौर
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