शाहजहांपुर। सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद एक अक्तूबर से होगी। प्रशासन ने इसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। केंद्रों पर धान बेचने के लिए किसानों को अपना रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। हालांकि अभी तक केवल 15 हजार किसानों ने रजिस्ट्रेशन कराया है जबकि तीन लाख किसानों ने धान की फसल की उपज की है। इसके लिए अफसर विभागीय पोर्टल में तकनीकी खराबी बता रहे हैं।
जिले में लघु और सीमांत मिलाकर कुल करीब चार लाख किसान हैं। इसमें लगभग तीन लाख से अधिक किसानों ने इस वर्ष धान की फसल की है। इनमें अभी तक रजिस्ट्रेशन बमुश्किल 15000 किसानों ने कराया है। पिछले वर्ष 1.83 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया, लेकिन क्रय केेंद्रों पर केवल 49570 पंजीकृत किसानों के धान की क्रय केंद्रों पर तौल हो सकी। अधिकारियों का कहना है कि विभागीय पोर्टल (एफसीएस.यूपी.जीओवी.इन) किसी तकनीकी खराबी के कारण बंद होने से किसानों के पंजीकरण की रफ्तार तेज नहीं हो पा रही है।
समर्थन मूल्य पर बिकेगी सिर्फ 25 फीसदी उपज
जिले में 2.87 लाख लघु-सीमांत किसानों समेत कुल 4.06 लाख किसान हैं। अधिकांश किसान हर साल खरीफ सीजन में मुख्य फसल के तौर पर धान की रोपाई करते हैं। गत वर्ष किसानों ने लगभग 80 हजार हेक्टेयर में धान की विभिन्न किस्मों की रोपाई की थी। करीब 15 लाख टन धान का उत्पादन हुआ, लेकिन शासन की क्रय नीति के तहत कुल उत्पादन का 25 फीसदी धान समर्थन मूल्य पर बिक सका। अधिकतम किसान समर्थन मूल्य हासिल कर सकें, इसके लिए विभिन्न क्रय एजेंसियों के 133 केंद्र खोले जा रहे हैं और किसानों का पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।
बिचौलियों का हस्तक्षेप रोकना चुनौती
समर्थन मूल्य पर धान की सरकारी खरीद में बिचौलियों का हस्तक्षेप रोकना प्रशासन के लिए इस बार भी बड़ी चुनौती होगा। हालांकि, इससे निपटने के लिए शासन के निर्देशानुसार किसानों का धान रकबा के आधार पर पंजीकरण शुरू कर दिया गया है। इसके लिए ब्लॉक मुख्यालयों पर कैंप लगाकर किसानों को जागरूक किया जा चुका है, लेकिन रजिस्ट्रेशन कराने पर भी समर्थन मूल्य मिलने की कोई गारंटी नहीं क्योंकि बिचौलिये और गल्ला आढ़ती अगली फसल की जरूरतों के लिए किसानों को एडवांस भुगतान कर उन्हें अपना कर्जदार बना लेते हैं। बाद में उन्हीं की खतौनियों पर अपने धान की तौल कराकर मुनाफा खुद हड़प लेते हैं। गत वर्ष कई केंद्र प्रभारियों ने बिचौलियों से मिलीभगत करके किसानों का धान खरीदने के बजाय उन्हें टरकाना शुरू किया तो उनके पास अपनी उपज औने-पौने दामों में मंडियों में गल्ला आढ़तों पर देने या फिर बिचौलियों के हवाले करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। नतीजा यह हुआ कि रजिस्ट्रेशन कराने वाले सभी किसान समर्थन मूल्य हासिल नहीं कर सके।
अभी तक प्रदेश में सर्वाधिक 15109 किसानों का पंजीकरण इसी जनपद में हुआ है। डीएम ने सभी एसडीएम को किसानों का पंजीकरण कराने का लक्ष्य दिया है। इस काम में लेखपालों की ड्यूटी भी लगाई गई है। खरीद शुरू होने पर क्रय केंद्रों की निगरानी बढ़ाकर बिचौलियों पर विशेष नजर रखी जाएगी। लखनऊ में कोई तकनीकी समस्या आने के कारण विभागीय पोर्टल चार-पांच दिन से बंद है, लेकिन यह जल्द चालू हो जाएगा।
- कमलेश पांडेय, उप संभागीय खाद्य विपणन अधिकारी