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मीटर लगाकर होगी जलकर वसूली, खाली प्लाट का भी देना होगा टैक्स

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शाहजहांपुर। अब पानी की बर्बादी और गली-मोहल्लों में प्लाट खरीदकर खाली छोड़ना महंगा पड़ सकता है। शासन की ओर से टैक्स वसूली के नियमों में संशोधन का मन बनाया है, जिसके तहत नगर निगम क्षेत्र में रहने वालों को एक निर्धारित सीमा से अधिक पानी का इस्तेमाल करने पर मीटर की रीडिंग के हिसाब से जलकर देना होगा। साथ ही प्लाट खरीदकर उस पर निर्माण न करवाने पर भी टैक्स वसूला जाएगा।
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बता दें कि वर्तमान व्यवस्था के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में रहने वाले लोगों से गृहकर व जलकर की वसूली की एनुअल रेंटल वैल्यू (एआरबी) के हिसाब से की जाती है। इसके अनुसार किसी भी प्रॉपर्टी के एक साल के किराए की वैल्यू निकाली जाती है। उस रेंटल वैल्यू का 22 प्रतिशत नगर निगम द्वारा गृहकर और जलकर के रूप में वसूला जाता है। इसमें 11 प्रतिशत गृह और 11 प्रतिशत जलकर देना होता है। मगर अब नगर निकाय की ओर से टैक्स वसूली में परिवर्तन करने और नए कर लागू किए जाएंगे, ताकि नगर निगम की आय बढ़ाई जा सके। इसकी सिफारिश नगर निकाय के वित्तीय संसाधन बोर्ड द्वारा की गई है।
जरूरत से अधिक इस्तेमाल पर देना होगा जलकर
जिस तरह से बिजली का बिल जमा करने के लिए रीडिंग को देखा जाता है, ठीक उसी तरह से अब पानी के बिल का भुगतान भी करना होगा। हालांकि इसके लिए एक सीमा निर्धारित की जाएगी। अगर एक परिवार में पांच सदस्य है और वहां पर 100 लीटर पानी की जरूरत है तो नगर निगम की ओर से उतना पानी बिना किसी शुल्क के दिया जाएगा लेकिन उससे अधिक पानी इस्तेमाल करने पर फ्लो मीटर की रीडिंग के अनुसार बिल का भुगतान करना होगा।
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पानी की बर्बादी और कॉमर्शियल इस्तेमाल पर लगेगी रोक
मीटर रीडिंग के हिसाब से वाटर टैक्स वसूले जाने का उद्देश्य पानी की बर्बादी और कॉमर्शियल यूज पर रोक लगाना है। अभी तक लोग वाहन धोने, सड़क साफ आदि कामों में पानी का बेहिसाब उपयोग करते हैं। इससे पानी की बर्बादी होने के साथ ही वाटर लेवल भी लगातार गिर रहा है। ऐसे में लोगों को पानी की कीमत समझ आएगी साथ ही नगर निगम की आय में भी इजाफा होगा।
डलावघर नहीं बनेंगे प्लाट
शहर के विभिन्न मोहल्लों में ऐसे कई प्लाट पड़े हैं, जिन पर सालों से कोई निर्माण नहीं करवाया जा रहा। यह खाली प्लाट अब डलावघर बन चुके हैं। जिनका उपयोग मोहल्ले वालों द्वारा कूड़ा डालने के लिए किया जाता है। मगर इनकी सफाई नगर निगम को करवानी पड़ती है। शासन की ओर से ऐसे प्लाट स्वामियों से भी टैक्स वसूलने के निर्देश दिए जा सकते हैं, जिन्होंने प्लाट खरीदने के बाद निर्माण कराए बिना ही उन्हें छोड़ दिया है।
नगर निकायों की आय बढ़ाने के लिए शासन नई नीति लागू करने की तैयारी में है। इसकी सिफारिश नगर निकायों के वित्तीय संसाधन बोर्ड द्वारा की गई है। इससे न सिर्फ नगर निगम की आय बढ़ेगी, महानगरवासियों को नई सुविधाएं भी मिलेंगी। नई नीति निर्धारित होने पर गृहकर पहले की तरह ही बना रहेगा,लेकिन जल कर उतना देना होगा जितना पानी उपयोग करेंगे। इसके लिए एक सीमा निर्धारित होगी, उससे ज्यादा पर टैक्स देय होगा। शासन की नीति बनने पर फ्लो मीटर सभी जगह लगेगा। पानी सभी का संसाधन है।
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- संतोष शर्मा, नगर आयुक्त
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