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सरकार के खिलाफ भड़के किसान, जलाई गन्ने की होली

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पुवायां। गन्ने की फसल में बढ़ती लागत और समर्थन मूल्य न बढ़ने से इसकी खेती अब किसानों के लिए घाटे का सौदा होती जा रही है। लागत निकालने के बाद किसानों को एक क्विंटल गन्ने पर महज 25 रुपये ही बच रहे हैं। इसी वजह से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की तरह अब जिले के किसान संगठनों ने गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने का मन बना लिया है। सोमवार को पुवायां में विरोध करते हुए किसानों ने गन्ने की होली जलाई और सरकार से समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग की।
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भाकियू के जिलाध्यक्ष मंजीत सिंह के नेतृत्व में किसान सोमवार को पुवायां के राजीव चौक पर इकट्ठा हुए और प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए गन्ने की होली जलाई। इस मौके पर मंजीत सिंह ने कहा कि तीन वर्ष से गन्ने का रेट नहीं बढ़ाया जा रहा है, जबकि चीनी के रेट लगातार बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि चीनी मिलें कोर्ट और सरकार का आदेश नहीं मानती हैं और भुगतान नहीं दे रही हैं, लेकिन सांठगांठ के चलते कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। तहसील अध्यक्ष अनिल सिंह यादव ने कहा कि किसान हित की बात नहीं करने वाली सरकार को सत्ता में रहने का कोई हक नहीं है। गन्ना मूल्य को लेकर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस मौके पर करनैल सिंह, नीरज वर्मा, जरनैल सिंह, श्रीकृष्ण जाटव, वीरेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार, विनोद राठौर सहित तमाम किसान मौजूद रहे।
तीन सौ खर्च, 325 रेट, यह कैसा अन्याय
पुवायां। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह ने कहा कि गन्ने की फसल में सारे खर्च मिलाकर गन्ना तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल पड़ रहा है और सरकार तीन साल से रेट 325 रुपये प्रति क्विंटल रख रही है। किसान को प्रति क्विंटल महज 25 रुपये मिल रहे हैं। खेती घाटे का सौदा होती जा रही है, ऐसे में किसान आत्महत्या नहीं तो और क्या करेगा। उन्होंने कहा कि संगठन के मुखिया वीएम सिंह के निर्देश पर जल्द बड़े पैमाने पर आंदोलन शुरू किया जाएगा।
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