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साहब! यह कैसा खेल.... जिनको जरूरत नहीं उनको जारी कर दिए आयुष्मान कार्ड

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शाहजहांपुर। साहब! यह किस तरह से सरकार की योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। जिनको जरूरत है वह सिस्टम की चौखट पर नाक रगड़ते घूम रहे हैं और जिनको मुफ्त इलाज की जरूरत नहीं है, उनको घर जाकर लाभान्वित किया जा रहा है। पुवायां और तिलहर तहसील में आयुष्मान योजना के लाभार्थियों की पड़ताल करने पर यही सच सामने आया है। कई लाभार्थियों से बात करने पर पता चला कि उन्हें अपने नाम से आयुष्मान कार्ड जारी होने की कोई जानकारी तक नहीं है।
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खुटार कसबा निवासी स्व. हरवंशलाल के पुत्र अशोक कुमार के नाम आयुष्मान कार्ड बनाया गया है। इस कार्ड में उनके परिवार के सदस्य रोजी जिंदल, राहुल जिंदल, आशी जिंदल के नाम शामिल हैं। अशोक कुमार के पिता के नाम एक पेट्रोल पंप खुटार कसबे में मैलानी रोड पर है, जिसकी देखभाल वह खुद कर रहे हैं। इसके अलावा वह एक राइस मिल में साझीदार हैं। इसी प्रकार खुटार के एक पूर्व ब्लॉक प्रमुख समेत कई बड़े फार्मर के नाम से भी आयुष्मान योजना के कार्ड जारी किए गए हैं।
मेरे नाम कोई आयुष्मान कार्ड बना है, इसकी मुझे जानकारी नहीं है। ऐसा है तो मैं स्वयं अधिकारियों से अनुरोध करूंगा कि मेरा कार्ड निरस्त कर किसी गरीब के नाम आवंटित कर दिया जाए।
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-अशोक कुमार, खुटार
सूची में नाम होने से बेखबर योजना के लाभार्थी
तिलहर। प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को अमलीजामा पहनाने में अभी इतने झोल हैं कि तमाम पीड़ितों को अभी इस योजना की खबर तक नहीं है। 23 सितंबर को योजना लागू हुए एक वर्ष बीत जाएगा। यही नहीं, 15 सितंबर से आयुष्मान पखवाड़े की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन सरकार की मुफ्त इलाज देने की मंशा अभी अधूरी है। वर्ष 2011 की आर्थिक, सामाजिक एवं जातीय जनगणना के अनुसार क्षेत्र में 14736 आयुष्मान भारत लाभार्थी हैं। इनमें तिलहर नगर क्षेत्र के 5663 तथा ग्रामीण क्षेत्र के 9073 लाभार्थी शामिल हैं। इनमें तमाम ऐसे लाभार्थी हैं, जिन्हें सूची में अपना नाम होने की जानकारी नहीं है।
लाभार्थियों से बातचीत
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बुजुर्ग भगवानदास में इलाज की जागी आस
नगर के मोहल्ला भक्सी बाल्मीकि बस्ती के 70 वर्षीय भगवान दास को सूची में नाम शामिल होने की जानकारी नहीं है। बोले: आपसे पता चला है, लेकिन इस बारे में कोई अधिकृत जानकारी नहीं मिली। 15 वर्ष से सांस की बीमारी से पीड़ित हूं, लेकिन इलाज के लिए पैसे नहीं होने से घर में पड़ा रहा। अब योजना से जारी कार्ड के सहारे इलाज करा सकूंगा।
बीमारी से जूझ रहे दिव्यांग बुजुर्ग भन्नू
भक्सी मोहल्ले के ही बाल्मीकि बस्ती निवासी 75 वर्षीय दिव्यांग भन्नू का कूल्हा कई साल पहले टूट गया था, जिससे वह चलने फिरने से लाचार हैं। वर्ष 2002 में नगरपालिका से सेवानिवृत्त होने के बाद वह घर पर पड़े रहते हैं। सांस फूलने की बीमारी के साथ ही आंत भी उतर आती है। आयुष्मान लाभार्थी सूची में नाम होने की जानकारी देने पर बोले कि अब इलाज होने की उम्मीद बंधी है।
हृदय रोग से पीड़ित हैं लाभार्थी धनपाल
भक्सी मोहल्ले के ही 50 वर्षीय धनपाल मजदूरी करके अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं लेकिन दिल की बीमारी से पीड़ित होने से कमजोरी लगती है। आयुष्मान सूची में नाम होने की जानकारी दिए जाने पर अमर उजाला को धन्यवाद देकर बोले कि जल्द कार्ड बनवाकर इलाज कराएंगे।
इलाज को तरस रहे 74 वर्षीय रामनिवास
भक्सी मोहल्ले के 74 वर्षीय रामनिवास सेवानिवृत्त अध्यापक हैं। लंबे अरसे से स्वास्थ्य खराब है, लेकिन आयुष्मान सूची में नाम होने की उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। बताए जाने पर वह खुश होकर बोले कि कल ही अस्पताल जाकर अपना कार्ड बनवाएंगे और बुखार तथा कमजोरी का इलाज कराएंगे।
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