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बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे कारखाने

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शाहजहांपुर/ददरौल। जिले में चार दशक पहले रोजा में इंडस्ट्रियल एरिया विकसित किया गया था। वहां कई इकाइयां लगने के बाद भूखंड नहीं बचे तो वर्ष 2007 में कांट रोड पर जमौर के पास जमीनें अधिग्रहीत कर वहां भी औद्योगिक आस्थान विकसित किया गया। यूपीएसआईडीसी (उप्र राज्य औद्योगिक विकास निगम) के अधिकारी वहां प्रबंधन देखते हैं लेकिन जमौर के उद्यमियों को खस्ताहाल सड़कों और ड्रेनेज सिस्टम की कमी जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।
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जमौर औद्योगिक क्षेत्र के बिल्कुल करीब इंडियन ऑयल कारपोरेशन का गैस रिफलिंग प्लांट है। आईओसी डिपो के भारी वाहनों के अतिक्रमण से उद्योग इकाइयों को अक्सर तैयार माल से भरे ट्रक बाहर भेजने में कठिनाई होती है। यही नहीं, भारी वाहनों की आवाजाही से सड़कों की हालत खराब है। मुख्य मार्ग गड्ढों में तब्दील है। वहां की नालियां गंदगी से चोक हो चुकी हैं। इसलिए बुधवार को हुई मामूली बारिश में सड़कों पर जलभराव से कीचड़ हो गया है।
इंडस्ट्रियल एरिया की गली नंबर सात में मुर्गी दाना बनाने वाली शगुना कंपनी के कारखाने के पास नाली व्यवस्था चौपट होने के कारण कंपनी के वर्कर पंपिंग सेट लगाकर पानी बाहर निकालते दिखे। मुख्य सड़क समेत सभी मार्गों पर प्रकाश व्यवस्था भी चौपट है। गली नंबर दो में कुछ खंभों पर लाइटें लगी दिखीं, लेकिन वह लंबे अरसे से खराब पड़ी हैं। औद्योगिक क्षेत्र में ही दो पार्क बनाए गए लेकिन परिसरों को डलावघर में बदल दिया है। उद्यमियों के अनुसार कांट रोड पर एक फैक्ट्री के कर्मचारी रात में राख से भरी ट्रालियां वहां लाकर उड़ेल जाते हैं।
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उद्योग बंधु की बैठकें रस्म अदायगी तक सीमित
इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के चैप्टर प्रेसीडेंट शुभम खन्ना के अनुसार खराब ड्रेनेज व्यवस्था, जर्जर सड़कों समेत आईओसी डिपो के वाहनों के अतिक्रमण आदि समस्याओं पर चर्चा लगातार हो रही है लेकिन हालातों में सुधार नहीं हुआ। उन्होंने बताया कि यूपीएसआईडीसी ने सड़क, नालियों की मरम्मत, सफाई आदि बुनियादी कामों के लिए मेंटीनेंस चार्ज सालाना आठ रुपये वर्ग मीटर से बढ़ाकर 24-25 रुपये वर्ग मीटर कर दिया है। लघु उद्योग इकाइयों को हर साल एक से सवा लाख रुपये शुल्क देने पर भी सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
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उद्यमियों की बात
फोटो: 21 एसपीएनपी 26
यूपीएसआईडीसी की जिम्मेदारी है कि वह जमौर औद्योगिक क्षेत्र का रखरखाव कर जमीनी प्रबंधन से जुड़ी सड़क, सफाई, पथ प्रकाश, गंदे पानी की निकासी आदि काम कराए, लेकिन निगम के अधिकारी केवल निरीक्षण की रस्म निभाने आते हैं। उद्यमी हर साल लाखों रुपये रखरखाव शुल्क देते हैं। शुल्क के भुगतान में देरी होने पर उद्यमियों पर पेनाल्टी लगा दी जाती है, लेकिन सुविधाएं देने की बात कोई नहीं करता। -पंकज पांडेय, फर्नीचर निर्माता, जमौर इंडस्ट्रियल एरिया
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फोटो: 21 एसपीएनपी 25
यूपीएसआईडीसी की कार्यशैली पूरे प्रदेश में ठीक नहीं है। गोरखपुर, फतेहपुर आदि कई जनपदों के उद्यमी औद्योगिक आस्थानों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। सरकार एमएसएमई का बहुत नाम ले रही है, लेकिन अधिकारी उद्योगों की दिक्कतों पर उतना ध्यान नहीं दे रहे, जितना दिया जाना चाहिए। इंडस्ट्रियल एरिया में भारी वाहनों की आवाजाही को देखते वहां की सड़कों, ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने के लिए बजट बढ़ाया जाना चाहिए। इस बारे में सरकार और शासन स्तर पर जल्द वार्ता करूंगा। -अशोक अग्रवाल, राष्ट्रीय अध्यक्ष, इंडयिन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
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जमौर औद्योगिक आस्थान की व्यवस्थाएं ठीक रखने की जिम्मेदारी यूपीएसआईडीसी को दी गई है। उद्योग बंधु समिति की बैठक में वहां के उद्यमी जो भी समस्या उठाते हैं उससे यूपीएसआईडीसी के अधिकारियों को भी अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।-दुर्गेश कुमार, उद्योग उपायुक्त
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