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ईद पर कोरोना से जल्द निजात दिलाने की मांगी दुआ

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शाहजहांपुर के ईदगाह में पांच लोगों को नमाज पढ़ाते मौलाना हुजूर अहमद मंजरी। - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। जिले में ईद उल फितर का त्यौहार सादगी के साथ मनाया गया। पहली बार ऐसा हुआ कि ईद के दिन ईदगाह और मस्जिदें सूनी रहीं। लोगों घरों में रहकर नमाज पढ़ी। बड़ी और छोटी ईदगाह और मस्जिदों में केवल पांच-पांच लोगों ने नमाज की रस्म निभाई। बड़े खुत्बा में जामा मस्जिद के पेश इमाम मौलाना हुजूर अहमद मंजरी ने पांच लोगों को नमाज पढ़ाई। उन्होंने अल्लाह ताला से कोरोना महामारी से जल्द निजात दिलाने की दुआ की।
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उन्होंने कहा कि अल्लाह मुल्क को इस महामारी से बचाए ताकि अगले साल फिर ईद के मौके पर ऐसी वीरानी देखने को नहीं मिले। फिर से अल्लाह की खिदमत में नमाजियों की जमात इकट्ठा हो सके। पेश इमाम ने कहा कि इस मुसीबत की घड़ी में सभी को एक-दूसरे का साथ देना है। अपने घर के आसपास गरीबों और जरूरतमंदों की हर संभव मदद की जाए यही आज की ईद का सबसे बड़ा संदेश है। इससे समाज में भाईचारा मजबूत होगा और सभी इस मुसीबत में एक-दूसरे का दामन थामकर आगे बढ़ सकेंगे। बड़े खुतबा में मौलाना मंजरी ने ईदगाह प्रबंध समिति के पदाधिकारी राहत अली खां, आफाक अली खां बच्चन, तारिक अली, अब्दुल कादिर खां और अहसन रजा के साथ नमाज पढ़कर दुआ की।
ईद पर सोमवार को शहर का नजारा भी हमेशा से जुदा था। बड़े खुतबे में नमाज पढ़ने के लिए जहां ईदगाह से जुड़ने वाली सड़कों पर लोगों रेला चलता था, वहां सोमवार को सन्नाटा पसरा था। ईदगाह में नमाजियों से कहीं अधिक संख्या में पुलिसकर्मी नजर आ रहे थे। एसपी डॉ. एस चन्नप्पा, सिटी मजिस्ट्रेट विनीता सिंह और सीओ सिटी ने ईदगाहों का भ्रमण कर वहां निगरानी व्यवस्था का जायजा लिया। ईदगाह के नजदीक मेला वाला मैदान भी बच्चों के नहीं निकल पाने से उदासी मेें डूबा जैसा महसूस हुआ।
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सूनी रहीं ईदगाह की सड़कें
शाहजहांपुर। ईदगाह मार्ग पर लगने वाले मेला को देखते हुए हमेशा रूट डायवर्जन किया जाता था, लेकिन इस बार ऐसा कुछ देखने को नहीं मिला। ईद की नमाज पढने को ईदगाह पहुंचने के लिए लोगों को रास्तों पर भीड़ उमडने से आधा से एक घंटा लग जाता था, लेकिन इस बार सड़कें सूनी पड़ी रहीं। न तो कहीं जाम लगा और न ही पुलिस को बैरिकेडिंग करनी पड़ी। ईदगाह के आसपास की जिन सड़कों पर आज के दिन नमाजी दिखते थे, वह दिन भर खाली पड़ी रहीं।
मजारों पर रोजेदारों ने पढ़ा फातेहा
शाहजहांपुर। ईद पर सामूहिक नमाज पढने के बाद रोजेदार क्षेत्र के कब्रिस्तान में अपने सगे संबंधियों की मजारों पर जाकर गुलाब के फूल चढ़ाकर और अगरबत्तियां जलाकर फातेहा पढ़ते हैं। मुस्लिम समाज का मानना है कि जो इस दुनिया को छोड़ चुके हैं, वह सालभर आज के दिन का इंतजार करते हैं। इसीलिए लोगों ने इस बार भी यह परंपरा निभाकर अपने बड़े-बुजुर्गों और सगे-संबंधियों को याद किया।
मायूस होकर लौटे मेला देखने गए बच्चे
शाहजहांपुर। सामूहिक धार्मिक आयोजनों पर कोरोना को लेकर लगाई गई बंदिशों का मुस्लिम समाज के बड़े-बुजुर्गों और युवाओं ने पूरी तरह पालन किया, लेकिन नासमझ बच्चे उनसे पूरी तरह बेखबर रहे। हमेशा ईद पर मेला देखने बच्चे परिवार के लोगों के साथ ईदगाह जो रहे, लेकिन इस बार ज्यादातर रोजेदार घरों पर रहे तो ईदगाह के आसपास के मोहल्लों के कई बच्चे टोलियों में मेला देखने निकल पड़े। यह अलग बात रही कि ईदगाह के मेला मैदान से दुकानें, झूले, आइसक्रीम, चाट-पकौड़े के ठेले नदारद देख बच्चे मायूस होकर अपने घरों को लौटते देखे गए।
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