शाहजहांपुर। चिन्मयानंद से सवा करोड़ रुपये मांगने के मामले में घिरे भाजपा के पूर्व जिला महामंत्री व जिला सहकारी बैंक (डीसीबी) के चेयरमैन धर्मेंद्र प्रताप सिंह उर्फ डीपीएस राठौर और भाजपा नेता अजीत सिंह मंगलवार को कोर्ट में पेश नहीं हुए। घर पर मौजूद न होने की वजह से पुलिस दोनों आरोपियों को समन तामील नहीं करा पाई थी। उनके कोर्ट में उपस्थित नहीं होने पर सीजेएम ओमवीर सिंह ने दोनों के खिलाफ दोबारा समन जारी करते हुए 3 दिसंबर को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया है।
पूर्व गृह राज्यमंत्री चिन्मयानंद से फिरौती मांगे जाने के मामले में छात्रा और उसके दोस्तों संजय, सचिन, विक्रम के साथ डीसीबी चेयरमैन डीपीएस राठौर और भाजपा नेता अजीत सिंह को भी एसआईटी ने अपनी जांच में आरोपी पाया। दोनों पर चिन्मयानंद से सवा करोड़ रुपये की फिरौती मांगे जाने का आरोप तय करते हुए एसआईटी ने सीजेएम कोर्ट में छह नवंबर को चार्जशीट दाखिल की थी। दोनों आरोपियों के खिलाफ कोर्ट ने समन जारी कर उन्हें 19 नवंबर को पेश होने के आदेश दिए थे।
कोर्ट ने 14 नवंबर को पुलिस को समन भेज दिए थे, लेकिन पुलिस आरोपियों को समन तामील नहीं करा पाई। कोर्ट को समन लौटाते हुए सदर कोतवाली पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि कि डीसीबी चेयरमैन के घर का दरवाजा बंद था, वह घर पर नहीं मिले। वहीं रामचंद्र मिशन थाना पुलिस ने बताया अजीत घर में नहीं थे। उनके परिवार वालों ने समन लेने से इनकार कर दिया। मंगलवार को दोनों के कोर्ट में पेश नहीं होने पर सीजेएम ने दोबारा समन जारी कर दिए।
दूसरी बार समन के बाद जारी हो सकता है वारंट
सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष बांके बिहारी मिश्र का कहना है कि यदि किसी आरोपी को कोर्ट से किसी मामले में पेश होने के लिए समन जारी होता है और उसने समन तामील नहीं किया है, तय तारीख पर आरोपी नहीं पहुंचता है तो कोर्ट उसे दोबारा समन जारी कर पेश होने का आदेश दे सकता है। इसके बाद जमानती वारंट और फिर गैर जमानती वारंट जारी हो सकता है।