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कोरोना से अनाथ 33 बच्चों की पढ़ाई सरकार कराएगी, बांटे स्वीकृति पत्र

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शाहजहांपुर के गांधी भवन प्रेक्षागृह में बृहस्पतिवार को कोरोना से अपने माता-पिता को खोकर अनाथ हु? - फोटो : SHAHJAHANPUR
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शाहजहांपुर। कोरोना में अपने माता-पिता को खोकर अनाथ और बेसहारा हुए जिन बच्चों को मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना की पात्रता के दायरे में शामिल किया गया है, उनमें अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने की काफी ललक दिखी। उनका कहना है कि वे इस योजना के तहत मिलने वाली सरकारी सहायता अपनी पढ़ाई-लिखाई पर खर्च करेंगे।
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ऐसे 33 बच्चों को गांधी भवन प्रेक्षागृह में बृहस्पतिवार को हुए एक कार्यक्रम में विधायक मानवेंद्र सिंह और डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने उपहार सहित आर्थिक सहायता के स्वीकृत पत्र वितरित किए।
उल्लेखनीय है कि इस योजना के तहत अनाथ हुए 18 वर्ष आयु तक के बच्चों के भरण-पोषण, शिक्षा, चिकित्सा आदि व्यवस्थाओं के लिए चार हजार रुपये मासिक आर्थिक सहायता अनुमन्य की गई है। कक्षा 12 तक निशुल्क शिक्षा के लिए ऐसे बच्चों को कस्तूरबा और अटल आवासीय विद्यालयों मेें प्रवेश दिलाया जाएगा।
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साथ ही कक्षा नौ से ऊपर की कक्षाओं में पढ़ने वाले ऐसे बच्चों को टेबलेट व लैपटॉप देने और अनाथ बेसहारा बालिकाओं के विवाह को 1.01 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है।
जनपद में ऐसे 60 बच्चों की पहचान की गई है। इनमेें छह ऐसे बच्चे हैं, जिनके माता-पिता दोनों का कोरोना से निधन हो चुका है जबकि 54 बच्चे ऐसे हैं जिनकी माता अथवा पिता में किसी एक का कोरोना से निधन हुआ है।
बृहस्पतिवार को कार्यक्रम में 33 बच्चों को चॉकलेट और टॉफी पैकेट के साथ स्वीकृति पत्र मिले तो उनके मुरझाए चेहरों पर खुशी तैर गई। विधायक मानवेंद्र सिंह ने इन सभी बच्चों को शुभकामनाएं देने के साथ उनका हौसला बढ़ाते हुए कहा है कि प्रदेश की सरकार बेहद संवेदनशील है और मुख्यमंत्री ने ऐसे बच्चों का भविष्य संवारने की इस योजना के माध्यम से अनुकरणीय पहल की है। डीएम इंद्र विक्रम सिंह ने कहा कि माता-पिता को खोने वाले बच्चे कभी भी खुद को अकेला नहीं समझें क्योंकि सरकार और शासन से लेकर पूरा प्रशासन तंत्र उनकी हर संभव मदद को हमेशा तत्पर रहेगा।
जिला प्रोबेशन अधिकारी गौरव मिश्रा ने कहा कि जिन बच्चों को स्वीकृति पत्र मिले हैं, उनके खातों में 12-12 हजार रुपये भेजे जा रहे हैं और शेष बच्चों को भी जल्द आर्थिक सहायता भेजी जाएगी।
आर्थिक संरक्षण ने जगाई उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद
सरकार से मिले आर्थिक संरक्षण ने कोरोना से अनाथ हुए बच्चों और उनकी देखरेख करने वाले परिवारीजनो, निकट संबंधियों में उनके उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें जगा दी है। बच्चों से हुई बातचीत से जाहिर हुआ कि उन्होंने अपने मन में जो सुनहरे सपने बुने, उन्हें वे सरकारी मदद से पूरा करके रहेंगे।
मीरानपुर कटरा क्षेत्र के गांव कुनिया निवासी राम निवास की बेटी अर्चना। मां सदासुखी बेटी की पढ़ाई का बहुत ध्यान रखती थी। उनकी मदद और देखरेख मेें उसने हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी कर ली। गत मई में अर्चना की मां कोरोना की दूसरी लहर की चपेट में आ गईं। कोविड अस्पताल में गहन उपचार के बावजूद गत 14 मई को उनकी सांसें थम गईं। पिता के साथ स्वीकृति पत्र लेने आई अर्चना बोली कि सरकार जो पैसे देगी, उससे अगली कक्षा में दाखिला लेकर कोर्स की किताबें और यूनिफार्म खरीदेगी।
शहर के मोहल्ला खिरनीबाग निवासी माही सक्सेना से भी कोरोना की दूसरी लहर ने उसके पापा प्रदीप सक्सेना को छीन लिया था। प्रदीप परिवार की आजीविका के लिए कपड़ों की सिलाई का काम करते थे। उनके निधन के बाद परिवार पर आर्थिक संकट छाया तो माही अपने पापा के हाथ की सिली शर्ट बेचने के लिए बाजार पहुंची। मां पिंकी के साथ स्वीकृति पत्र लेर्ने आइं माही ने कहा कि कई संगठनों के साथ सरकार से मिली मदद के सहारे वह अपनी पढ़ाई जारी रखेगी।
तिलहर क्षेत्र के गांव पुरायूं रुजवारी से अपने बुजुर्ग बाबा ओमकार के साथ स्वीकृति पत्र लेने आया सौरभ अभी सातवीं क्लास में पढ़ता है, लेकिन माता-पिता की मौत से टूटे विपदा के पहाड़ ने उसे बेहद गंभीर बना दिया है। उससे बात करके यह जानने की कोशिश कि उस पर क्या बीती। बोलने से पहले ही उसका गला भारी हो गया ओर आंखें डबडबा उठीं। ओमकार से पता चला कि उसकी मां का पहले ही निधन हो चुका है और अब कोरोना ने उसके पिता रूपराम को भी उससे छीन लिया। सौरभ के अनुसार वह खूब पढ़कर बाबा का सहारा बनेगा।
जैतीपुर क्षेत्र के गांव नदैया रामपुर से आई रामदास की बेटी शर्मिला पहले बहुत बोलती थी, लेकिन माता-पिता के निधन के बाद से गुमसुम रहने लगी है। वह अपने बाबा के साथ स्वीकृति पत्र लेने आई। उन्हीं से पता चला कि पहले कोरोना से उसके पिता चल बसे और गत तीन मई को कोविड अस्पताल में उसकी मां चंपा देवी की सांसें भी थम गईं। शर्मिला कक्षा नौ में पढ़ती है। उसने पढ़ाई जारी रखने अरमान जाहिर किया तो बाबा ने बहू-बेटे की याद में आंखें पोंछते हुए कहा कि शर्मिला जितना चाहेगी, उतना पढ़ाएंगे।
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